गगन से होगी चांद की अमृतमय वर्षा, खीर की प्रसाद का होगा वितरण

सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद – सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा के नाम से जानी जाती है। शरद पूर्णिमा व्रत को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।शरद पूर्णिमा महोत्सव स्लीमनाबाद तहसील क्षेत्र मे आस्था व उल्लास के साथ मनाया जायेगा!
तहसील क्षेत्र के मंदिरों मे सुबह से लेकर देर शाम तक विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे!स्लीमनाबाद स्थित सिंहवाहिनी मंदिर, दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, हरिदास ब्रजधाम कोहका, कौड़िया स्थित श्रीराम जानकी मंदिर व खिरहनी स्थित जगदीश धाम मंदिर मे शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया जायेगा!वहीं घरों व मंदिरों मे भी महिलाओं के द्वारा पूजा अर्चना की जाएगी!पंडित रमाकांत पौराणिक ने जानकारी देते हुए बताया कि 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी!इसके अलावा स्नानदान पूर्णिमा 26 अक्टूबर को रहेगी!शरद पूर्णिमा पर चांद अपनी पूरी 16 कलाओं से युक्त होता है।साथ ही चंद्रमा की चांदनी अमृत से युक्त होती है। इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। जो जाग रहा होता है, उसे वे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है। इस साल शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्दि, रवि, हर्षण योग व रेवती ओर अश्वनी नक्षत्र में चंद्रमा से अमृत वर्षा होगी।
तीन शुभ योग मे चन्द्रमा से होगी अमृत वर्षा
पंडित दिलीप पौराणिक ने बताया कि शरद पूर्णिमा इस साल बहुत उत्तम संयोग बन रहे है! शरद पूर्णिमा पर रेवती ओर अश्विनी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्दि, रवि व हर्षण योग का संयोग बन रहा है!इस दिन रात में गाय के दूध की खीर बनाकर अर्द्ध रात्रि को भगवान को भोग लगाकर खीर को चांदनी रात में रखा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से चंद्रमा की किरणों से खीर में अमृत प्राप्त होता है।आधी रात में चंद्रमा को भी अर्घ्य देना चाहिए। पूर्णिमा की चांदनी औषधि गुणों से युक्त होती है। इसमें रखी खीर का सेवन करने से चंद्र ग्रह संबंधी दोष जैसे कफ सर्दी छाती के रोग, मानसिक कष्ट या डिप्रेशन की समस्या और हार्मोनल संबंधी बीमारी में लाभकारी है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने रास लीला की थी, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
लघु वृंदावन धाम बांधा मंदिर में होगा शरद महोत्सव
श्री राधाकृष्ण मंदिर लघु वृंदावन धाम बांधा में 25 अक्टूबर रविवार को शरद महोत्सव आयोजित होगा । सायं 6बजे स्थानीय बालक बालिकाओं द्वारा पवित्र गोप- गोपिका के भाव से नृत्य महाआरती तथा अत्यंत मनभावक गरबा नृत्य होंगे । सायं 7 बजे भगवान श्री राधा कृष्ण जी, आदि शक्ति मां गायत्री जी, भगवान भोलेनाथ जी, विघ्न विनाशक गणेश जी एवं हनुमान जी की भव्य महाआरती होगी । शरद पूर्णिमा के संबंध की पौराणिक गाथा अनुसार इस रात्रि में भगवान श्री कृष्ण जी ने जगत को आनंदित करने हेतु श्री राधा रानी जू एवं गोपियों के साथ परम महारास रचाया था तथा प्रकृति ने अमृत वर्षा की थी । ऐसे ही अप्रतिम वातावरण में बांधा मंदिर में भगवान के महारास के दर्शन के साथ अमृतरूपी खीर प्रसाद का वितरण होगा । श्री राधा कृष्ण सेवा समिति के पंडित रामनरेश त्रिपाठी, नवनीत चतुर्वेदी ,महेश पाठक, सीताराम मिश्रा ,मनोज पाठक, सत्येंद्र त्रिपाठी ,कृष्णकांत पांडे ,राघवेंद्र दुबे ,ओमप्रकाश दुबे, द्वारका मिश्रा आदि ने समस्त श्रद्धालु जनों से मंदिर पधार कर पुण्य लाभ प्राप्त करने की प्रार्थना की है ।
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