भये प्रकट कृपाला” से गूंजा रामलीला मैदान, बधाईयों और आतिशबाजी के बीच मना श्रीराम जन्मोत्सव

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राजेश मदान बैतूल। 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव के तीसरे दिन श्रीराम जन्म का मंचन ऐसा रहा, मानो बैतूल के रामलीला मैदान में अयोध्या धाम उतर आया हो। रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने सजीव अभिनय से पौराणिक प्रसंग को भावपूर्ण बना दिया।
रामलीला मैदान में सोमवार, 12 अक्टूबर को रात्रि 9 बजे से श्रीराम जन्म प्रसंग का मंचन शुरू हुआ। कथा में अयोध्या के राजा दशरथ की संतान प्राप्ति को लेकर चिंता दिखाई गई। महर्षि वशिष्ठ और श्रृंगी ऋषि के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ कुंड से अग्निदेव के प्रकट होने और राजा दशरथ को चरू प्रसाद प्रदान करने के दृश्य को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद राजा दशरथ की तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा द्वारा प्रसाद ग्रहण करने का प्रसंग दिखाया गया, जिसने श्रीराम जन्म की कथा की भूमिका तैयार की।

चौपाई गूंजी तो जयकारों से भर उठा पूरा पंडाल

मंचन का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। जैसे ही मंच से भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी…की चौपाई गूंजी, श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए। करतल ध्वनि और जय श्रीराम के जयकारों से पूरा मैदान गूंज उठा। इसके बाद राजा दशरथ द्वारा गुरु वशिष्ठ को बुलाने, नामकरण संस्कार और चारों राजकुमारों राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के बाल्यकाल से जुड़े दृश्यों का मंचन किया गया। कलाकारों ने माता कौशल्या और राजा दशरथ के वात्सल्य भाव को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

सोहर और बधाई गीतों पर झूमे श्रद्धालु, आतिशबाजी से बढ़ा उत्साह

श्रीराम जन्म की खुशी में पारंपरिक सोहर, बधाई गीत और मंगल गान प्रस्तुत किए गए। ढोल-नगाड़ों की थाप और आतिशबाजी के बीच श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया। अयोध्या में जन्मोत्सव के उल्लास को दर्शाते दृश्यों ने पूरे आयोजन को उत्सवमय बना दिया। रामलीला के मंच पर धार्मिक कथा, पारंपरिक गीतों और जीवंत अभिनय का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक डूबे रहे।

69 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ा रहा आयोजन

बैतूल गंज स्थित रामलीला मैदान में आयोजित 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव का आयोजन श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा किया जा रहा है। इसमें पंजाब युवा सेवा समिति एवं श्री कृष्ण पंजाबी महिला कीर्तन मंडल, बैतूल का विशेष सहयोग मिल रहा है। 12 दिवसीय इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक आदर्शों से जोड़ना है। आयोजन में महिलाओं के बैठने के लिए पृथक व्यवस्था भी की गई है।

आज ताड़का वध और अहिल्या उद्धार का होगा मंचन

रामलीला उत्सव के चौथे दिन मंगलवार, 13 अक्टूबर को रात्रि 9 बजे से महर्षि विश्वामित्र के आगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुरी आगमन के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, राक्षसी ताड़का के वध और अहिल्या के उद्धार की कथा को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

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