क्या ऐसे पढ़ेगा इंडिया? पाठ शाला बचाने छात्र – छात्राओं ने लगाई गुहार,एसडीएम कार्यालय के सामने दिया धरना प्रदर्शन

सिहोरा: एक तरफ तो सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तरह-तरह के वादे करती है कहीं स्कूटी तो कहीं लेपटॉप देने की योजना चलाई जा रही है, इसके बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश विद्यालयों में बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है, ताजा मामला सिहोरा का है जहाँ पर स्कूल बचाने के लिए नन्हे मुंन्हे बच्चों को सिहोरा एसडीएम ज्योति परस्ते के सामने धरना पर्दशन करना पड़ा,ऐसे में सवाल उठना लाजमी हो जाता है की क्या यही सपनो का भारत है? जहाँ पर पाठ शाला बचाने के लिए नवनिहालो को धरना प्रदर्शन करना पड़े ?
यह है मामला
विद्यालय मर्ज किये जाने से आहत नन्हे मुन्ने छात्र छात्राओं ने सिहोरा अनुविभागीय कार्यालय पहुँच कर विद्यालय मर्ज करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।विद्यालय के प्रधान अध्यापक, पालक शिक्षक संघ के अध्यक्ष के अनुसार ग्राम मगरकटा में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला को कलेक्टर के आदेशानुसार बंद कर दिया गया है तथा विद्यालय को लगभग 1 किलोमीटर दूर ग्राम घुघरा की शासकीय शाला में मर्ज कर दिया गया है।ग्राम के अधिकांश विद्यार्थी छोटे-छोटे बच्चे हैं। उन्हें प्रतिदिन लगभग 1 किलोमीटर दूर दूसरे ग्राम में विद्यालये जाने में कठिनाई होगी। विशेषकर छोटे बच्चों के लिए इतनी दूरी तय करना अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है। इससे बच्चों की नियमित उपस्थिति एवं उनकी शिक्षा प्रभावित होने की संभावना है।
जिला सदस्य ने सोपा ज्ञापन
ग्राम पंचायत बघेली के अंतर्गत ग्राम मगरकटा ब्लाक तहसील मझौली जिला जबलपुर के समस्त ग्रामवासी एवं अभिभावक गण अपने गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ी अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील समस्या को लेकर जिला सदस्य की अगुवाई में तहसील कार्यालय सिहोरा पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम मगरकटा में विगत कई वर्षों से शासकीय माध्यमिक शाला संचालित है। यह विद्यालय गांव के गरीब, किसान, मजदूर एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख आधार है। इस विद्यालय से केवल बच्चों को शिक्षा ही नहीं मिल रही, बल्कि उनके सपनों, भविष्य और आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद भी जुड़ी हुई है। मगरकटा के इस विद्यालय को बंद किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यदि विद्यालय बंद कर दिया गया, तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा गांव के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ेगा। विद्यालय बंद होने के बाद छोटे-छोटे बच्चों को लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरे गांव में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाना पड़ेगा। एक ओर शासन द्वारा हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव में वर्षों से संचालित विद्यालय को बंद किया जाना ग्रामीण बच्चों के हित में उचित प्रतीत नहीं होता।
इंडिया पोल खोल को आर्थिक सहायता
प्रदान करने हेतु इस QR कोड को किसी भी UPI ऐप्प से स्कैन करें। अथवा "Donate Now" पर टच/क्लिक करें।
Click Here >>
Donate Now
इंडिया पोल खोल के YouTube Channel को Subscribe करने के लिए इस YouTube आइकन पर टच/Click करें।
इंडिया पोल खोल के WhatsApp Channel को फॉलो करने के लिए इस WhatsApp आइकन पर टच/Click करें।















