नर्मदा घाटों के ट्रस्ट की मांग ठंडे बस्ते में क्यों?,निजी हाथों में नर्मदा घाट,कौन खा रहा मलाई,व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं 

 

न नाले बंद हुए न बन रहा ट्रस्ट आखिर कौन नहीं चाहता नर्मदा जी के घाटों का विकास 

(पवन यादव ):संस्कराधानी में माँ नर्मदा के पवित्र जल को अपवित्र कर रहे गंदे नालों पर न तो सरकारें आजतक प्रतिबंद लगा पाईं है न ही नर्मदा जी के घाटों को ट्रस्ट के रूप में बनाया गया है, जबकि कई सालों से नर्मदा भक्त सरकार और प्रशासन से लगातार मांग करते आ रहे है की माँ नर्मदा के पवित्र जल को अपवित्र करने वाले गंदे नालों में नकेल कसी जाए इसके साथ ही नर्मदा जी के ग्वारीघाट सहित अन्य घाटों को सरकार ट्रस्ट बना दे ताकी इन घाटों का विकाश के साथ यहाँ की व्यवस्था भी अच्छी हो सके लेकिन नर्मदा भक्तों की ये पुकार आज तक सुनकर अनसुनी कर दी गई ,ये बात अलग है की विधायक से लेकर मंत्री और राष्ट्रपति ने भी नर्मदा जी का आशीर्वाद लिया,इतना ही नहीं कोई भी बड़े अधिकारी जबलपुर में पदस्थ हुए तो उन्होंने माँ नर्मदा का आशीर्वाद लिया है, जीवनदायनी मॉ नर्मदा से सबने कुछ न कुछ तो जरूर लिया लेकिन माँ नर्मदा को दिया क्या? गंदा पानी ,इतना ही नहीं माँ नर्मदा का सीना छलनी कर रेत भी निकाली जा रही है, जबकी पानी से रेत जब निकाल ली जाएगी तो एक दिन कीचड़ के अलावा कुछ नहीं बचेगा और धीरे -धीरे जलस्तर गिरने लगेगा,जिसका ताजा उदाहरण नर्मदा जी की सहायक नदी हिरन को देखा सकता है, एक समय पर सदाबहार अविरल धारा से बारहों माह बहने वाली हिरन नदी तीन चार  वर्षों से गर्मी आते ही सूखने लगी है,जिसकी बजह अंधाधुंध रेत का अवैध उत्खनन,

ट्रस्ट की मांग क्यों की जा रही है अनसूनी

आपको बता दें की माँ नर्मदा प्रदूषण नियंत्रक एवं विकास समिति द्वारा लंबे समय से माँ नर्मदा के घाटों को ट्रस्ट बनाने की मांग की जा रही है, समिति के सदस्यों ने ट्रस्ट की मांग को लेकर कलेक्टर एसडीएम सहित अन्य आला अधिकारियों के कई बार चक्कर लगाकर थक चुके है ,सभी ने आस्वासन तो जरूर दिया लेकिन आजतक नर्मदा जी के घाटों को ट्रस्ट में तब्दील करने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डली हुई है,जबकि घाटों के ट्रस्ट बनने के बाद नर्मदा जी के घाटों से आने वाला राजस्व सरकार को मिलने लगेगा ,जिससे सरकार नर्मदा जी के घाटों का और अच्छे से विकास कर सकती है,

कौन डाल रहा अड़ंगा ?

ट्रस्ट बनाये जाने की मांग पर अधिकारियों ने गौर  तो किया लेकिन स्थानीय राजनीति हावी हो गई ,लंबा टीका लगाकर खुद को सबसे बड़ा नर्मदा भक्त बताने वाले ही माँ नर्मदा के घाटों के विकास में रोड़ा बन गए ये बात अलग रही की सरकारी तंत्र इनकी पहुँच के आंगे नतमस्तक हो गया फिर बनी फाइलों और ट्रस्ट बनाने की सुंदर मांग पर राजनीति का ग्रहण ऐसा लगा की आजतक नर्मदा जी के घाटों की व्यवस्था निजी हाथों में है, जिसके चलते आज न तो वाहन स्टैंड व्यवस्थित है ,न ही पंडो के बैठने की व्यवस्था ,आलम ये है की नर्मदा जी के घाटों में सब अपनी मनमर्जी से चल रहा है,

क्यों बनना जरूरी है ट्रस्ट

गौरतलब है की माँ नर्मदा के भक्तों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है, और लगभग सभी लोग अपने वाहन लेकर घाट तक जाते है, जिससे घाट में अराजकता की स्तिथि बन जाती है, वाहन पार्किंग की व्यवस्था घाट के ऊपर करना सबसे पहली प्रथमिकता होनी चाहिए ,दूसरा आज घाटों में आये दिन लोग कही भी टेंट पंडाल लगाकर भंडारा प्रसाद ,वितरित करने लगते है, जिससे घाटों पर गंदगी होती है, जिसके लिए एक निश्चित स्थान चयनित किया जाना चाहिए,नर्मदा आरती,प्रतिदिन होने वाली नर्मदा महाआरती और बीच नर्मदा में बना नर्मदा मंदिर व्यक्तिगत हाथों में है, घाट पर आज किसी भी प्रकार का कोई भी काम चाहे साफ सफाई हो या बिजली व्यवस्था ,या घाटों का निर्माण ये सभी प्रशासन करता है ,ऐसे में कुछ लोग बिना किसी तरह का शुल्क चुकाए इन सब व्यवस्थाओं का लाभ ले रहे है, नमर्दा महाआरती के साथ बीच नर्मदा में बना मंदिर भी ट्रस्ट में शामिल होना चाहिए,भिखारी ,आज देखा जाए तो पूरे घाट पर भिखारियों का कब्जा रहता है, जो की घाट पर ही रहते है और वहीं गन्दगी फैलाते है, इनके बैठने और रुकने का अलग से स्थान होना चाहिए,घाटों में अतिक्रमण के बादल भी है क्योंकि यहाँ पर यहाँ वहाँ लगने वाली दुकानों को भी एक नियत स्थान पर लगवाना होगा,जिससे घाट अतिक्रमण मुक्त के साथ स्वच्छ हो सके ,लोग कई साल तक माँ नर्मदा की परिक्रमा करते है लेकिन आज परिक्रमा वासियों के लिए घाट में कहीं भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे परिक्रमा वासियों सहित बाहर से आने वाले श्रद्धालु परेसान होते है, इनके लिए एक आश्रय स्थल बनना जरूरी है,नावों को भी ट्रस्ट में शामिल किया जाना होगा ताकि नाव चलाने वाले नाविक एक्सपर्ट हो और भविष्य में कोई घटना न हो ,घाट पर चिकित्सा की भी व्यवस्था होनी चाहिए ,इसके साथ ही नर्मदा जी के घाटों में पुलिस के साथ सीसीटीव्ही कैमरों की निगरानी भी जरूरी है,

 

 

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