इस जर्जर सड़क के गढ्ढो में गिरकर घायल होने वाले राहगीरों के जख्म कब दिखाई देंगे जिम्मेदारों को ?


चुनाव के पहले ही क्यों याद आई जर्जर सड़क की याद ?

जबलपुर :ये रास्ता देखकर ही आप समझ गए होंगे की हम आपको जबलपुर स्मार्ट सिटी में प्रवेश के रास्ते के बारे में बता रहे है, एक तरफ तो सरकार सड़कों को लेकर लोक लुभावने वादे करती है, लेकिन इस सड़क के दर्शन के बाद आप समझ जाएंगे की दिया तले अधेला ही रहता है,ये कहावत यहां पर जरूर फिट बैठती है,

गौरतलब है जबलपुर को सरकार ने स्मार्ट सिटी का दर्जा  दिया है, लेकिन इस ऊबड़खाबड़ सड़क ने स्मार्ट सिटी की पोल खोल कर रख दी है, बात यदि सड़कों की ही करें तो रद्दी चौकी से हाईकोर्ट जाने वाली सड़क भी पूरी तरह स्मार्ट नहीं है, वहां भी नगर निगम ने सड़क के एक हिस्से में तो थिगरा लगा दिया लेकिन इस बीच कई जगहों पर आपको सड़क के बीच व दूसरे हिस्से में गढ्ढे देखने को मिल जाएंगे ,अब ऐसे में सवाल उठता है की क्या नगर निगम सड़कों को स्मार्ट बनाने के लिए गम्भीर नहीं है ? क्या करौदा वायपास से आधारताल तक के बीच इस जर्जर सड़क के गढ्ढो में गिरकर घायल होने वाले राहगीरों के जख्म जिम्मेदारों को नहीं दिखाई देते? इन तमाम तरह के सवाल आमजन के दिलोदिमाक में है,इसी बीच एक बात और निकल कर आई की अब इस सड़क का टेंडर हो चुका है लेकिन क्या जब नगरीय निकाय के चुनाव आये तब ही नेताजी व प्रशासन को इस जर्जर सड़क की याद आई ?

यहां के लोग ज्यादा हो रहे प्रभावित

आपको बता दें की करौदा वायपास और आधारताल के बीच हाउसिंग बोर्ड कालोनी,महराजपुर ,व्हीकल मोड़ चौराहा , ,सुहागी कृषि विश्वविद्यालय,आते है, मतलब हजारों की  संख्या में लोग इस सड़क का उपयोग करते आ रहे है ,वो बात अलग है की नेता व अफसर कटंगी पाटन वायपास के रास्ते आना जाना करते होंगे ,इसलिए साहब को इन मजबूर राहगीरों का दुख दर्द नहीं दिखाई देगा जो इस गढ्ढो व धूल भरे रास्ते से सफर करने मजबूर है,

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