राम तेरी गंगा मैली हो रही शवों को बहाते- बहाते,कहां से आई  गंगाजी शवों की बाढ़ ?देखें वीडियो

साल 1985 में आई राम तेरी गंगा मैली हिंदी फिल्म खूब प्रचलित हुई  लेकिन आज गंगा के पवित्र जल में बहते शवों से वास्तव में गंगा का निर्मल पानी मैला हो रहा है,कोरोना ने इस तरह कोहराम मचाया लोगों ने बिना अंतिम संस्कार के शवों को गंगाजी में ही बहाने लगे,

 

 

ये भयानक तस्वीरें गंगा नदी की है ,खबरों के मुताबिक गंगा में उतराती लाशें इन दिनों चर्चा का विषय हैं। कोरोना काल में इनकी संख्या अचानक क्या बढ़ी, एकाएक बहस का मसला बन गई। दरअसल गंगा किनारे बसे तमाम पूर्वांचल के गांवों में जल प्रवाह के तौर पर अंतिम संस्कार भी एक कुप्रथा का रूप रहा है, जो अबतक कायम है। हालांकि, इन दिनों जो यह संख्या में इजाफा देखा जा रहा है, वह लकड़ियों के बढ़ते दामों और मरने की वालों की संख्या में इजाफे की वजह से है।बलिया जिले के टुटुवारी गांव के रहने वाले राम मुरारी राय बताते हैं कि जल प्रवाह गंगा किनारे बसे पूर्वांचल के गांवों में अंतिम संस्कार की एक विधि है। तमाम वृद्ध लोग कई बार जल प्रवाह को अंतिम इच्छा बताते हैं तो उनके साथ ऐसा किया जाता है। आर्थिक कारण भी हैं इसके। इसके अलावा सर्प दंश जैसी आकस्मिक मौतों के बाद अंतिम संस्कार जल प्रवाह के तौर पर ही किया जाता रहा है।’लकड़ियों के दाम बढ़ने से भी लोग कर रहे ऐसा
यह प्रथा अब भी कायम है। हालांकि इस बीच जब गांवों में कोरोना संक्रमण फैल रहा है और लोगों की मौत हो रही है तो इसमें बेतहाशा इजाफा देखने को मिल रहा है। इसके पीछे की बड़ी वजह लोगों की आर्थिक स्थिति और लकड़ियों के बढ़ते दाम हैं। लकड़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं घाटों पर। कई जगहों पर दो गुना से ज्यादा दाम वसूला जा रहा है। इसपर किसी का नियंत्रण भी नहीं है। यही वजह है कि जो लोग अक्षम हैं, वे अंतिम संस्कार के तौर पर लाशों को जल में प्रवाहित कर रहे हैं।

सरकारी मदद आखिर कैसे

सरकार ने पंचायतीराज विभाग के तहत व्यवस्था की है कि गांवों में जिन लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो रही है, उनके परिवारीजनों को अंतिम संस्कार के लिए 5000 रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी। हालांकि गांवों में इस तरह की मदद की स्थिति बेहतर नहीं है। देवरिया के रहने वाले विक्रम बताते हैं कि गांवों में जिन लोगों की मौत हो रही है, उनमें कोरोना के लक्षण हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण को पुष्ट करने वाली रिपोर्ट नहीं है। ऐसे में मदद दी नहीं जा सकती। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने जांच तो करवाई और रिपोर्ट आने के पहले ही उनकी मौत हो जा रही है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए रिपोर्ट तक तो नहीं ही रुका जा सकता है।

बरेली के गांवों में कोरोना से दर्जनों मौत

बरेली और उसके आसपास के कई गांवों में भी कोरोना संक्रमण का असर देखने को मिल रहा है। कई ग्राम प्रधान अपने गांव में बीते कुछ दिनों में महामारी से कई लोगों की मौतों का दावा कर रहे हैं। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि गांवों में सघन जांच के आदेश दिए गए हैं और मौतों का ऑडिट किया जाएगा। आंवला संसदीय क्षेत्र के नगर्रिया सतन गांव की प्रधान गुड्डी देवी का दावा है कि उनके गांव में बीते 10 दिनों में 12 लोगों की जान जा चुकी है।

 

नवाबगंज में 40 से ज्यादा मौतें

एएनएम-सहायक नर्स से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी को भी सूचना दी जा चुकी है। सेंथल टाउन एरिया के अध्यक्ष एजाज कम्बोज ने उनके इलाके में बीते 15 दिनों में 20 लोगों की जान जाने की बात कही है। बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्र राठौर ने नवाबगंज में पिछले 15 दिनों में विधायक केसर सिंह समेत 40 से ज्यादा लोग के मरने की सूचना दी है।

रोजाना संक्रमण के 500 से 750 नए मामले

दुनका गांव की प्रधान जरीन बेगम के मुताबिक बीते एक हफ्ते में छह लोग महामारी से मर चुके हैं। गणेशपुर के प्रधान प्रेम सिंह दावा करते हैं कि उनके गांव में सात मई से छह लोगों की जान जा चुकी है। इन दावों के बीच बरेली के सीएमओ डॉ. सुधीर गर्ग कहते हैं, ‘गांवों में जांच न होने, संदिग्ध संक्रमितों की सूचना मिली है। सीएचसी प्रभारियों को सघन जांच के आदेश दिए गए हैं और मौतों का ऑडिट किया जाएगा। रोजाना संक्रमण के 500 से 750 नए मामले सामने आ रहे हैं।’

 

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