विश्वकर्मा जयंती,यह दिन श्रमिक समुदाय के लिए रखता है विशेष महत्व 



 

ज्योतिषचार्य, निधिराज त्रिपाठी,विश्वकर्मा जयंती हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए भक्त इस दिन उचित अनुष्ठानों के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला वास्तुकार माना जाता है और वे निर्माण एवं सृजन का देवता माने जाते हैं। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने इंद्रपुरी, भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी, सुदामापुरी, इंद्रप्रस्थ, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंकानगरी, पुष्पक विमान, शिव के त्रिशूल, यमराज के कालदंड और विष्णु चक्र सहित अनेक देवताओं के राजमहल के बाद दुनिया का भी निर्माण किया था, इसलिए इस दिन लोग अपने औजारों, हथियारों, वाहनों, मशीनों आदि की पूजा करते हैं। यह दिन श्रमिक समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है।

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त:

पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7:11 से रात 9:10 बजे तक है।

दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर में है और दोपहर 1:45 बजे से दोपहर 3:20 बजे तक रहेगा।

तीसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 3:20 बजे से शाम 4:53 बजे तक है।
*ज्योतिषी, अंकशास्त्री और वास्तु विशेषज्ञ*
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