आज विजया एकादशी :के दिन इस मंत्र का करें जप तो मिलेगा विष्णु विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ करने का पुण्य 

 

11 मार्च को महाशिवरात्रि को शिव पूजा से पुरानी परेशानियों से मिलेगी मुक्ति 

 

**ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार——** *व्रत विजया एकादशी*
*विशेष – हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*

 

**ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—–फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।** इस एकादशी के बारे में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को हर काम में विजय, सफलता की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि, लंका पर विजय करने से पूर्व भगवान राम ने समुद्र के किनारे यह पूजा की थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वकदाल्भ्य ऋषि ने भगवान श्रीराम से उनके सेनापतियों के साथ विजया एकादशी व्रत को करने की सलाह दी थी।

ऐसे में कहा जाता है कि, जो कोई भी इंसान विजया एकादशी के दिन सच्ची श्रद्धा भक्ति के साथ इस दिन का पूजा व्रत करता है उसे हर काम में सफलता प्राप्त होती है। ज्ञात रहे इस दिन के व्रत में इस दिन से संबंधित कथा को अवश्य पढ़ना चाहिए।

कब है विजया एकादशी और क्या है इसका शुभ मुहूर्त?
इस वर्ष विजया एकादशी का व्रत 9 मार्च- मंगलवार के दिन किया जाएगा।

**विजया एकादशी शुभ मुहूर्त:**

विजया एकादशी पारणा मुहूर्त :06:37:14 से 08:59:03 तक 10, मार्च को

अवधि : 2 घंटे 21 मिनट

विजया एकादशी का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार जो कोई भी व्यक्ति विजया एकादशी का व्रत करता है उसे उसके जीवन में धन धान्य का लाभ मिलता है और साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के बारे में कहा जाता है कि, जो कोई भी व्यक्ति इस व्रत को करता है उसे किसी अन्य कठिन तपस्या से मिलने वाला फल प्राप्त होता है। इस व्रत को करने वाले इंसान को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इसके अलावा क्योंकि लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व प्रभु श्री राम ने भी इस व्रत को किया था ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान राम की भी पूजा का विधान बताया गया है।

विजया एकादशी पूजन विधि
विजया एकादशी का व्रत करने वाले इंसान को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद घट-स्थापना करें।
किसी साफ़ चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
**इसके बाद तस्वीर पर गंगा जल के साथ चावल और रोली छिड़कें और भगवान को भोग लगाएं। इस दिन की पूजा में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी के समक्ष भी घी के दीपक जलाएं और उनकी आरती उतारें।**
**इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।**
विजया एकादशी का व्रत रखने वाले इंसान को पूरे दिन मन ही मन में भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और शाम को आरती करने के बाद ही फलाहार ग्रहण करना चाहिए।
अगले दिन यानी द्वादशी के दिन सुबह भगवान श्री कृष्ण और राम की पूजा करें।
इसके बाद ब्राह्मण या किसी अन्य ज़रूरतमंद व्यक्ति को अपने यथा सामर्थ्य अनुसार भोजन कराएं और दक्षिणा दें और इसके बाद ही स्वयं व्रत का पारण करें।

विजया एकादशी व्रत की कथा
एकादशी का महत्व सुनने में अर्जुन को बेहद खुशी की अनुभूति हो रही थी। ऐसे में उन्होंने श्री कृष्ण भगवान से कहा कि, हे पुंडरीकाक्ष! फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और इस व्रत का क्या विधान है? कृपया करके मुझे विस्तार पूर्वक बताइए। तब जवाब में श्री कृष्ण ने कहा, “हे अर्जुन! फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को हर एक काम में विजय की प्राप्ति होती है। विजया एकादशी के महत्व को पढ़ने या श्रवण करने से सभी पापों का अंत हो जाता है। अब इस व्रत से संबंधित पौराणिक कथा कुछ इस प्रकार है।

एक बार देव ऋषि नारद ने ब्रह्मा जी से कहा, ‘हे ब्रह्मा जी! आप मुझे फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा उसकी विधि बताने की कृपा करें। नारद जी की बात सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा, ‘हे पुत्र! विजया एकादशी का व्रत किसी भी प्रकार के पाप को नष्ट करने वाला होता है। इस एकादशी का विधान मैंने आज तक किसी से नहीं कहा लेकिन, तुम्हें बता रहा हूं। जो कोई भी व्यक्ति विजया एकादशी का व्रत उपवास करता है उस मनुष्य को हर काम में विजय प्राप्त होती है। अब श्रद्धापूर्वक इस व्रत की कथा का श्रवण करो।

प्रभु श्री राम को जब 14 वर्ष का वनवास मिला तब वे माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ पंचवटी में निवास करने लगे थे। उसी समय महा-पापी रावण ने माता सीता का छल पूर्वक हरण कर लिया था। जब इस बात की भनक प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी को लगी तब वे बेहद दुखी हुए और वन-वन भटक कर सीताजी को ढूंढने लगे। जंगल में घूमते हुए जब वे मरणासन्न जटायु के पास पहुंचे तब जटायु ने उन्हें माता सीता के हरण का पूरा वृतांत कह सुनाया और भगवान श्री राम की गोद में जटायु ने अपने प्राण त्याग कर स्वर्ग की तरफ प्रस्थान किया। इसके बाद कुछ आगे चलने पर श्री राम और लक्ष्मण जी की सुग्रीव के साथ मित्रता हो गयी और वहां उन्होंने बाली का वध किया।

इसके बाद प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी ने लंका में जाकर माता सीता का पता लगाया और माता सीता से प्रभु श्री राम और महाराज सुग्रीव की मित्रता का वर्णन किया। लंका से लौटने के बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका का सारा वृतांत प्रभु श्री राम को कह सुनाया। सब हाल जानने सुनने के बाद श्री रामचंद्र ने सुग्रीव की सहमति से वानर सेना और भालू की सेना के साथ लंका की तरफ प्रस्थान किया। समुद्र किनारे पहुंचने पर श्री राम जी ने विशाल समुद्र को घड़ियाल से भरा देख लक्ष्मण जी से कहा, ‘हे लक्ष्मण! अनेक मगरमच्छों और जीवों से भरी इस विशाल समुद्र को हम कैसे पार करेंगे?

प्रभु श्री राम की बात सुनकर लक्ष्मण जी ने कहा कि, ‘भ्राता श्री! आप पुरुषोत्तम आदि पुरुष हैं। आपके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। यहां से आधा योजन दूर कुमारी द्वीप में वकदाल्भ्य मुनि का आश्रम है वे अनेक नाम के ब्रह्माओं के ज्ञाता हैं। ऐसे में आप की विजय का उपाय उनके पास अवश्य मौजूद होगा। लक्ष्मण जी की ऐसी बात सुनकर प्रभु श्री राम वकदाल्भ्य ऋषि के आश्रम में गए और उन्हें प्रणाम कर बैठ गए। तब महर्षि वकदाल्भ्य ने पूछा, ‘हे श्री राम! आप मेरी कुटिया में किस प्रयोजन से आए हैं? तब प्रभु श्री राम ने वकदाल्भ्य ऋषि से कहा, ‘हे ऋषिवर! मैं यहां अपनी पूरी सेना के साथ आया हूं और मैं राक्षसराज रावण को जीतने की इच्छा से लंका जा रहा हूं लेकिन, मुझे यह समुद्र पार करने का कोई उपाय समझ नहीं आ रहा था। आप मुझे कोई हल बताएं।

तब महर्षि वकदाल्भ्य ने कहा, ‘हे राम! मैं आपको एक ऐसे अति उत्तम व्रत के बारे में बताता हूं जिसे करने से आपको आपके काम में विजय की प्राप्ति अवश्य होगी। तब प्रभु श्री राम ने पूछा यह कौन सा व्रत है जिसे करने से समय क्षेत्रों में विजय की प्राप्ति होती है? महर्षि वकदाल्भ्य ने जवाब देते हुए कहा, हे श्रीराम फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष विजया एकादशी का उपवास करने से आप अवश्य ही समुद्र पार कर लेंगे और युद्ध में भी आपको विजय की प्राप्ति होगी। इसके बाद प्रभु श्री राम ने ऋषि से इस व्रत की विधि पूछी। ऋषि ने बताया कि, उपवास के लिए दशमी के दिन सोना, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश में जल भरकर उसके ऊपर पंच पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित कर दें। उसके नीचे सात अनाज और ऊपर जौ रखें और इसके ऊपर भगवान विष्णु की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करें।

**एकादशी के दिन स्नान आदि करके धूप, दीप, नैवेद्य से भगवान की पूजा करें।** सारा दिन भक्ती के साथ उसके समक्ष रहे और रात्रि में जागरण करें। इसके बाद के अगले यानी द्वादशी के दिन किसी नदी या तालाब के किनारे स्नानादि से निवृत्त होकर उसको किसी ब्राह्मण को दान दे दें। ऐसे में यदि आप अपने साथियों के साथ इस व्रत को करते हैं तो आपको अपने काम में सफलता अवश्य प्राप्त होगी। तब मुनि का मुनि द्वारा बताए गए इस व्रत के बारे में सुनने के बाद प्रभु श्री राम ने विजया एकादशी का व्रत किया जिसके प्रभाव से रावण को उसके ऊपर उन्हें विजय की प्राप्ति हुई। ऐसे में कहा जाता है कि जो कोई भी मनुष्य इस व्रत का विधि विधान से पालन करता है उसे दोनों लोग में विजय की प्राप्ति होती है साथ ही जो कोई भी व्यक्ति इस व्रत का मन करता है या बढ़ता है और दूसरों को सुनाता है उसे बाजपेई के समान फल की प्राप्ति होती है

**लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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🌷 *महाशिवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *गुरुवार, 11 मार्च को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन की गई शिव पूजा से पिछले समय से चली आ रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं और धन लाभ भी मिल सकता है। यहां जानिए शास्त्रों में बताए गए उपाए…*
👉🏻 *शिवरात्रि पर करें इन 8 में से कोई 1 उपाय, दूर हो सकती है परेशानी*
🔥 *महाशिवरात्रि पर रात में किसी शिव मंदिर में दीपक जलाएं । शिव पुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के पास रोशनी की थी इसी वजह से अगले जन्म में वे देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।*
🙏🏻 *महाशिवरात्रि पर छोटा सा पारद (पारा) शिवलिंग लेकर आएं और घर के मंदिर में इसे स्थापित करें। शिवरात्रि से शुरू करके रोज इसकी पूजा करें । इस उपाय से घर की दरिद्रता दुर होती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।*
🙏🏻 *यदि आप चाहें तो शिवरात्रि पर स्फटिक के शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। घर के मंदिर में जल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से इस शिवलिंग को स्नान कराएं । मंत्र – ॐ नम: शिवाय । मंत्र जप कम से कम 108 बार करें।*
🙏🏻 *हनुमानजी भगवान शिव के ही अंशावतार माने गए हैं। शिवरात्रि पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमानजी और शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इनकी कृपा से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।*
👩🏻 *किसी सुहागिन को सुहाग का सामान उपहार में दें । जो लोग यह उपाय करते है, उनके वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं। सुहाग का सामान जैसे – लाल साड़ी, लाल चूडियां, कुम -कुम आदि।*
💰 *महाशिवरात्रि पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति को अनाज और धन का दान करें। शास्त्रों में बताया गया है कि गरिबों को दान करने से पुराने सभी पापों का असर खत्म हो सकता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।*
🍚 *जो लोग शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। ऐसे लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्ति करते हैं और कार्यों में सफल होते हैं।*
🌳 *शिव पुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रुप है। इसलिए इसकी पूजा करें।फूल, कुम -कुम, प्रसाद आदि चीजें विशेष रुप से चढ़ाएं । इसकी पूजा से जल्दी शुभ फल मिलते हैं।**

🌷 *महाशिवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *भगवान शिव बहुत भोले हैं, यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि (11 मार्च, गुरुवार) पर शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय करते हैं।*
*कुछ ऐसे ही छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है। ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है। ये उपाय इस प्रकार हैं-*
👉🏻 *महाशिवरात्रि पर करें ये आसान उपाय, प्रसन्न होंगे भोलेनाथ*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-*
👨‍👩‍👧‍👦 *1. बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।*

😇 *2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।*
😃 *3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।*
🙏🏻 *4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।*
😩 *5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।*
🚶🏻 *6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-*
🌷 *1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।*
🌷 *2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।*
🌷 *3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।*
🌷 *4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।*
🌷 *5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।*
🌷 *6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।*
🌷 *7. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।*
🌷 *8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।*
🌷 *9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।*
🌷 *10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।*
🌷 *11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।*
💰 *आमदनी बढ़ाने के लिए*
*महाशिवरात्रि पर घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें-*
*ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं*
*प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। माना जाता है ऐसा करने से व्यक्ति की आमदनी में इजाफा होता है।*

👪 *संतान प्राप्ति के लिए उपाय*
*महाशिवरात्रि की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें। उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।*

*यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।*

😩 *बीमारी ठीक करने के लिए उपाय*
*महाशिवरात्रि पर पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें। अभिषेक करते समय ऊं जूं स: मंत्र का जप करते रहें*
**लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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“जन्म दिनांक”
“जन्म समय”
“जन्म स्थान”
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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