शनि देव को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का स्पष्ट उच्चारण 



**ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार———-**
ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल देवता कहा जाता है। अर्थात शनिदेव लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यदि आपके कर्म शुभ होंगे और अच्छे होंगे तो शनिदेव आपको हमेशा अच्छा फल देंगे और इसके विपरीत यदि आप गलत काम करते हैं, दूसरों को दुखी करते हैं, झूठ बोलते हैं, छल करते हैं, तो इससे आपको शनिदेव की क्रोध का सामना भी अवश्य करना पड़ेगा। न्यायप्रिय शनि देव के जन्मदिवस को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है।

हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन शनि देव का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन को शनि जयंती के रूप से जाना जाता है। इस दिन यदि आप सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ शनिदेव की पूजा करते हैं, व्रत करते हैं, दान आदि करते हैं तो आपको शुभ फल की प्राप्ति अवश्य होती है। तो आइए जान लेते हैं इस वर्ष शनि जयंती किस दिन मनाई जाएगी, शनि जयंती का शुभ मुहूर्त क्या है महत्व क्या होता है और पूजन विधि क्या है।

**शनि जयंती कब मनाई जाएगी?इस साल 10 जून, 2021 को शनि जयंती मनाई जाएगी।**

शनि जयंती 2021 शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ – 09 जून 2021 दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त – 10 जून 2021 शाम 04 बजकर 22 मिनट पर

शनि जयंती 2021 महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि जो कोई भी व्यक्ति शनि देव की जयंती के दिन शनि देव की पूजा करता है और उनसे संबंधित चीजों को दान करता है ऐसे व्यक्तियों के जीवन में शनिदेव की कृपा हमेशा बनी रहती है और साथ ही कुंडली में मौजूद शनि दोष खत्म और दूर होता है। इसके अलावा इस दिन की पूजा करने से व्यक्ति के तमाम तरह के पाप और कष्ट आदि भी दूर होते हैं।

**शनिदेव से संबंधित वस्तुएं: साबुत उड़द, लोहा, तेल, तिल के बीज, पुखराज रत्न, काले कपड़े आदि।**

शनि जयंती की पूजन विधि
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ कपड़े धारण करें।
इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और बाहर जा सकते हैं तो बाहर जाकर शनिदेव के मंदिर में पूजा करें।
**इस दिन की पूजा में शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें और मुमकिन हो तो व्रत अवश्य करें।**
व्रत या कोई भी पूजा दान से ज्यादा फलदायी हो जाती है। ऐसे में अपनी यथाशक्ति के अनुसार दान पुण्य करें। आप दान के लिए शनिदेव की प्रिय वस्तुओं का चयन भी कर सकते हैं।
**शनि देव के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा**
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, शनि देव सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। बताया जाता है कि सूर्य देव का विवाह संज्ञा के साथ हुआ था। कुछ समय के बाद सूर्य देव के घर तीन संतानों ने जन्म लिया मनु, यम और यमुना। कुछ समय तक सूर्य देव की पत्नी संज्ञा ने सूर्य देव के साथ रिश्ता निभाने की पूरी कोशिश की हालांकि सूर्य के तेज की वजह से यह ज्यादा समय तक मुमकिन नहीं हो पाया और संज्ञा इसे सहन नहीं कर पाईं। इसलिए संज्ञा अपनी छाया को अपने पति सूर्य देव की सेवा में छोड़कर वहां से चली गयी। बताया जाता है इसके बाद सूर्य देव और छाया से शनि देव का जन्म हुआ।

शनि जयंती की पूजा में इन मन्त्रों को अवश्य करें शामिल
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जप करें।

“ॐ शं अभय हस्ताय नमः”

“ॐ शं शनैश्चराय नमः”

“ॐ नीलांजनसमाभामसं रविपुत्रं यमाग्रजं छायामार्त्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम”

**लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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