पर्यावरण को नुकसान के मामले में पहली बार लगा इस देश पर जुर्माना

 

दिल्ली ;दुनिया में पहली बार एक अनोखे मुकदमे का निपटारा हुआ है। पेरिस की एक अदालत ने फ्रांस सरकार को जलवायु खतरों से निपटने के लिए समुचित प्रयास नहीं करने का दोषी करार दिया है। अदालत ने फ्रांस सरकार पर एक यूरो का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया है। पेरिस की प्रशासनिक अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई हुई।दरअसल, दो साल पूर्व चार गैर सरकारी संगठनों ने यह मुकदमा दायर किया था, जिसे 23 लाख लोगों का समर्थन प्राप्त था। ऑनलाइन याचिका पर इतने लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। कई बार सुनवाई करने के बाद बुधवार को अदालत ने फैसला दिया। अदालत ने ऐतिहासिक फैसले में फ्रांस में जलवायु परिवर्तन पारिस्थितिकीय तंत्र को क्षति पहुंचने की बात मानी।

अदालत ने कहा कि फ्रांस सरकार ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने में नाकामयाब रही है, जिसके चलते पारिस्थितिकीय क्षति हुई। इस पर अदालत ने राज्य को मुआवज़े के रूप में 1 यूरो की प्रतीकात्मक रकम का भुगतान करने का आदेश दिया।

निर्णय के लिए दो महीने का समय

मुकदमे के दौरान पेरिस की अदालत ने समस्या को सुधारने और चीजों को खराब होने से रोकने के उपायों पर निर्णय लेने के लिए खुद को दो महीने का समय दिया। अदालत ने कहा कि क्षति की भरपाई के लिए सरकार को ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह स्वीकार करना कि राज्य की गलती से पारिस्थितिकीय क्षति हुई है, फ्रांसीसी न्याय में पहली बार हुआ है।

इन लक्ष्यों को नहीं किया पूरा
● रिन्यूएबल ऊर्जा-2020 के लिए लक्ष्य 23 है, लेकिन एक बड़ी क्षमता के बावजूद फ्रांस 2019 में केवल 17.2 तक पहुंचा है। यूरोपीय संघ में उसका प्रदर्शन सबसे खराब है।

● भवनों का ऊर्जा नवीकरण- प्रति वर्ष 0.2 की दर है। जबकि 2022 के बाद 1 प्रति वर्ष और 2030 तक प्रति वर्ष 1.9 की दर से कार्य होना है। जो रफ्तार है वह लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।

● कृषि- आर्गेनिक खेती : यह कार्य महज आठ फीसदी हुआ है, जबकि 2020 में इसे 20 फीसदी तक पहुंच जाना चाहिए था। जो कार्य किया जा रहा है उससे 2022 में सिर्फ 15 फीसदी का लक्ष्य ही हासिल किया जा सकता है।

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