जेल की जिस बैरक में नेताजी दो बार बंदी रहे, यह हमारे लिये तीर्थ स्थल है,सीएम शिवराज 

 

जबलपुर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिन पराक्रम दिवस पर जबलपुर केन्द्रीय जेल परिसर में स्थापित नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। उन्होंने नेताजी के बैरक पहुँचकर उनकी शयन पटिट्का पर श्रृद्धासुमन भी अर्पित किया। मुख्यमंत्री ने यहाँ बैरक में रखी हुई नेताजी की स्म़ृति प्रतीकों का अवलोकन किया।

इस अवसर पर सांसद  राकेश सिंह, विधायक द्वय  अजय विश्नोई और  नन्दिनी मरावी, जिला पंचायत की प्रशासकीय समिति की सभापति मनोरमा पटेल, पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू, डॉ. जितेन्द्र जामदार, विनोद गोंटिया, अभिलाष पाण्डे, जी.एस. ठाकुर, राममूर्ति मिश्रा और सुमित्रा बाल्मीक मौजूद थे।
मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि जेल की जिस बैरक में नेताजी दो बार बंदी रहे, यह हमारे लिये तीर्थ स्थल है। लोग यहाँ से देशभक्ति की प्रेरणा लें, इसलिये इसे प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग नेताजी की बैरक तक पहुँचकर दर्शन कर सकें, इसके लिये अलग से द्वार बनाया जाये। जो वर्तमान कैदियों के प्रवेश द्वार से पृथक हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी ने देश के लिये अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। यहाँ उनके पराक्रम और बलिदान गाथा को प्रदर्शित करती चित्र कथा तैयार कर लगाई जाये। जिसमें नेताजी की बचपन से लेकर आजाद हिन्द फौज बनाने और उनकी अंतिम यात्रा के समूचे जीवन वृत्तांत का प्रदर्शन हो। ताकि लोग यहाँ आकर नेताजी को नमन कर सकें।
उन्होंने कहा मैं यहाँ नेताजी को प्रणाम करने आया हूँ। देश को आजाद कराने देशभक्त, क्रांतिकारियों ने कितनी यातनायें सही उसकी एक झलक नेताजी के बैरक में देखने को मिलीं। यहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को यातना देने के अंग्रेजों के समय की हथकड़ी, फांसी के रिहर्सल का पुतला, बैलगाड़ी चक्का, दंडाबेड़ी, चक्की के अलावा नेताजी की हस्तलिखित पत्र की प्रतिलिपि भी यहाँ सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जेल की विजटिंग बुक में लिखा कि- “मैं आज उस बैरक में जहां नेताजी छह माह से ज्यादा क्रांतिकारी के रूप में रहे आकर धन्य हो गया, उनको मेरा प्रणाम। जेल प्रशासन को नेताजी की स्मृतियां सहेजकर रखने के लिए धन्यवाद। इस स्थल को देशभक्ति केन्द्र के रूप में विकसित करने का प्रयास होगा।”
नेताजी की 125वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज उनकी शयन पाटिट्का पर 125 मोमबत्तियाँ प्रज्जवलित कर उनको श्रृद्धा सुमन अर्पित किया गया। इसके पहले केन्द्रीय जेल के प्रवेश द्वार पर मुख्यमंत्री को सलामी दी गई। जेल अधीक्षक गोपाल प्रसाद ताम्रकार ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
इस मौके पर संभागायुक्त बी.चन्द्रशेखर, कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा, जेल अधीक्षक गोपाल प्रसाद ताम्रकार, जेलर मदन कमलेश और आर.पी. मिश्र उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री  चौहान ने ही 13 जून 2007 को आयोजित भव्य समारोह में केन्द्रीय जेल जबलपुर का नामकरण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर किया था। केन्द्रीय जेल जबलपुर में सुभाष बाबू पहली बार 22 दिसम्बर 1931 से 16 जुलाई 1932 तक तथा दूसरी बार 18 फरवरी 1933 से 22 फरवरी 1933 तक कारागार में रहे।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा के नारे से भारतीयों के हृदय में देश के लिये सर्वस्व बलिदान का जज्बा जगाने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती को पूरा देश आज पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा हैं।
क्रमांक/349/जनवरी-349/मनोज

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