मार्च के सुरुवात में ही सूखने लगी हिरन नदी  

 

जबलपुर/सिहोरा:लाखों लोगों की अपने शीतल जल से प्यास बुझाने वाली हिरन नदी का मार्च के सुरुवात में ही जलस्तर गिरने लगा है, हिरन नदी के खितौला मरहा घाट में साफ तौर पर देखा जा सकता है की नदी के किनारों से पानी खत्म हो गया और मिट्टी दिखाई देनी लगी है, आखिर कुछ वर्षों से हिरन नदी का जलस्तर गर्मी आते ही क्यों कम हो जाता है ? नौबत तो नदी के सूखने तक आ जाती है, गौरतलब है की हिरन नदी के पानी से मनुष्य ही नहीं पशु पक्षी ,और जंगकी जानवरों सहित नदी में रहने वाले असँख्य  जलीय जीव जन्तुओ का जीवन भी संकट में पड़ जाता है,

 

प्राकृतिक प्रकोप 

वहीँ स्थानीय बुज़ुर्गों की मानें तो इतिहास में ये कुछ वर्षो से ही हिरन नदी सूखने लगी है इसके पहले हजारों वर्ष पुरानी जीवंत हिरन नदी  भयंकर गर्मी में भी कभी जलविहीन नहीँ हुई नगर के बड़े बुजुर्ग नदी के इस प्रकार सूखने के पीछे प्राकृतिक प्रकोप भी मानते है  लेकिन कुछ वर्षो से नदी में अंधाधुंध रेत उत्खनन सहित नदी में फैक्ट्रियों का गन्दा पानी मिलने का कारण भी नदी के जलविहीन होने की बजह बताई जा रही है,साथ ही कुछ वर्षो से जीवित नदी को नर्मदा जल का आक्सीजन दिया जा रहा है विगत 4 वर्षो से हिरन नर्मदा के आक्सीजन रुपी जल से ही जीवित  है,

विसर्जन कुंड के पास लगे रेत के ढेर,

वहीँ हिरन के बरेली पुल में बने विसर्जन कुंड के समीप लगे ये रेत के ढेर बता रहे है की यहाँ से रेत का अवैध उत्खनन भी किया जा रहा है, मतलब विसर्जन कुंड भी रेत माफियो से नहीं बच पा रहा ,

इनका कहना है, अभी  स्टॉप डेम बनाया जा रहा है, ताकि पानी का ठहराव हो सके तकरीबन 15 दिनों बाद हिरन में नर्मदा का पानी छुड़वाया जाएगा 

नगर पालिका सीएमओ ,जय श्री चौहान सिहोरा

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