किसानों पर महंगाई की एक और मार से किसानों को टेंशन

 

जबलपुर :एक तो कोरोना के कहर ने वैसे ही लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है ,तो दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की महंगाई ने आदमी की जेब खाली कर दी है ऊपर से अब खाद की महंगाई ने किसानों को टेंशन में डाल दिया है,

खाद की महंगाई से टेंशन में किसान 

तो वहीँ एक तरफ जहां कोरोना महामारी के मौजूदा दौर में जहां एक और अर्थव्यवस्था वेपटरी हो गई है वहीं दूसरी ओर किसानों पर रसायनिक खाद के दाम में बढ़ोतरी से दोहरी मार पड़ रही है सबसे बड़ी खाद विक्रेता इफ्को ने डीएपी की कीमत में एकाएक 700 रुपये की बढ़ोतरी कर दी इससे किसानों को चिंता होने लगी है, वहीं सरकार के खिलाफ गुस्सा भी नजर आने लगा है। किसानों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर किसानों को दबाने का काम कर रही है। गेहूं पर समर्थन मूल्य बढ़ाया मात्र 30 रुपये, जबकि डीएपी पर 700 रुपये बढ़ा दिए गए। ऐसे में किसान कहां से खेती कर पाएगा। फर्टिलाइजर महंगी रसायनिक खाद महंगे डीजल पेट्रोल के चलते खेती अब घाटे का सौदा वन गई है किसानों ने मांग की है कि डीएपी के रेट कम हों।वहीं किसान नेताओं ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि किसानों की फसल के इतने कम दाम मिल रहे हैं, घर चलाना मुश्किल है। ऊपर से पहले ही बैंकों के कर्जे हैं। इस तरह से दाम बढ़ते रहे तो खेती करना ही छोड़ना पड़ेगा। डीएपी के अलावा सिंगल सुपर फास्फेट पाउडर एवं दानेदार के दामों में अचानक बढ़ोतरी से किसानों के आक्रोश को देखते हुए नायब तहसीलदार राहुल मेश्राम ने खाद दुकान एवं गोदाम का निरीक्षण कर स्टाक की जांच की। सोसाइटी के कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज गुप्ता का कहना है की स्कंध जिस दर से उपलब्ध हुआ है उसी दर से विक्रय किए जाने के निर्देश है।

सरकार ये क्या कर  दिया

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष एडवोकेट रमेश पटेल ने कहा कि सरकार की नीति व नियत बिल्कुल साफ नहीं है। सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है। सरकार दावे तो करती है कि किसानों की आय दोगुना होगी, लेकिन जिस तरह डीएपी की कीमत 700 रुपये बढ़ाई जा रही है, इससे आय दोगुुना तो दूर किसान खुद कर्जे में डूबने लगेगा। सरकार को डीएपी की इतनी ज्यादा कीमत बढ़ाने से पहले किसानों के बारे में सोचना चाहिए था। किसान पहले ही कर्जे में डूबा हुआ है। कभी गलत कृषि कानून तो कभी बीज के दामों में वृद्धि और अब डीएपी के दाम बढ़ा दिए। ऐसे में किसान का खेती करना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।

शेयर करें: