कटनीधर्ममध्य प्रदेश

श्रीकृष्ण- रुक्मणी विवाहोत्सव मैं झूमे श्रद्धालु,बरसाए फूल,धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाहोत्सव, गाये गये विवाह गीत



कटनी/स्लीमनाबाद(सुग्रीव यादव): ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद स्थित हरिदास मंदिर मैं सप्ताह ज्ञान यज्ञ चल रहा है।जिसमे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा चल रही है।कथा का वाचन पंडित दिलीप पौराणिक के मुखारविंद से किया जा रहा है।सप्ताह ज्ञान यज्ञ मैं प्रतिदिन श्रद्धालु पहुँचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे है कथा मैं छठवें दिवस रविवार को कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीलाओं का वर्णन करते हुए बतलाया कि भगवान भक्त के आधीन है। गोपियां मां कात्यायनी की पूजा करती हुई माता से प्रार्थना करती हैं कि हे मां मुझे नन्द किशोर को पति के रूप में दीजिये। प्रार्थना तो अच्छी है लेकिन गोपियां धर्म की मर्यादा का उल्लंघन कर रही है, क्योंकि जल में नग्न स्नान नहीं करना चाहिये।
कथावाचक ने रूकमणी विवाह का प्रसंग बताते हुये  कहा कि जब भक्त भगवान को सर्वस्य न्यौछावर कर देता है तो भगवान सामाजिक विडम्बना को त्याग कर अपने भक्त पर अनुग्रह करने के लिये गांधर्व विधि से भी विवाह कर लेते हैं। कथा में रुक्मणी विवाह धूमधाम से मनाया गया। जिसमें “आओ मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगा दो,मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बनादो सहित अन्य विवाह गीतों पर भक्त जमकर झूमे।विवाहोत्सव मैं बनी श्रीकृष्ण व रुक्मणि की झांकी ने भक्तों का मन मोह लिया।श्रीकृष्ण रुक्मणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई। कथावाचक ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मणी के भाई  उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था।लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगे। उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है। द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंत मैं भगवान श्रीद्वारकाधीशजी ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया।
सायंकालीन आरती कर कथा को विश्राम दिया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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