शरद नवरात्रि पूजा विधि



ज्योतिषचार्य, निधिराज त्रिपाठी,नवरात्रि के पहले दिन व्रती द्वारा व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन लोग अपने सामर्थ्य अनुसार 2, 3 या पूरे 9 दिन का उपवास रखने का संकल्प लेते हैं।संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी में जौ बोया जाता है और इस वेदी को कलश पर स्थापित किया जाता है। बता दें क्योंकि हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक काम से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है और कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है इसलिए इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है।
कलश को गंगाजल से साफ की गई जगह पर रख दें। इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन करें।
कलश में सात तरह के अनाज, कुछ सिक्के और मिट्टी भी रखकर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजा लें।
इस कलश पर कुल देवी की तस्वीर स्थापित करें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें इस दौरान अखंड ज्योति अवश्य प्रज्वलित करें। (अखंड ज्योति जलाने के नियम और सावधानियां जानने के लिए यह लेख अंत तक पढ़ें)।
अंत में देवी माँ की आरती गायें और प्रसाद को सभी लोगों में बाँट दें।
शारदीय नवरात्रि 2022: क्या करें-क्या ना करें
इन 9 दिनों में भूल से भी लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन ना करें।
नमक का सेवन ना करें। हालांकि, यदि बहुत आवश्यक है तो आप सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
चमड़े का प्रयोग ना करें।
अगरबत्ती का प्रयोग ना करें।
खंडित मूर्तियों पूजा के इस्तेमाल में ना लें।
माँ दुर्गा की आरती अवश्य करें।
नौ दिनों तक दोनों पहर पूजा अवश्य करें।
माता को अपनी यथाशक्ति के अनुसार अलग-अलग तरह के भोग अर्पित करें।
दिन में सोने से बचें।
इन 9 दिनों में दाढ़ी, मूंछ, और बाल भूल से भी ना काटें।
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर के साफ कपड़े पहनें और तब पूजा करें।
झूठ बोलने से बचें।
ब्रम्हचर्य का पालन करें।

शेयर करें: