गृह प्रवेश के लिए शास्त्रोक्त नियम

 

हर व्यक्ति के जीवन में गृह प्रवेश एक महत्वपूर्ण क्षण होता है। क्योंकि कड़ी मेहनत और प्रयासों के बाद घर का सपना साकार होता है, इसलिए शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश का विशेष महत्व है। शुभ घड़ी और तिथि पर गृह प्रवेश करने से घर में शांति,समृद्धि और खुशहाली आती है। गृह प्रवेश के मुहूर्त का निर्धारण तिथि, नक्षत्र, लग्न और वार आदि के आधार पर किया जाता है।

गृह प्रवेश के लिए शास्त्रोक्त नियम
●शास्त्रों में माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ माह गृह प्रवेश के लिये सबसे उत्तम माह मनाये गये हैं।
●चातुर्मास अर्थात आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन के महीनों में गृह प्रवेश करना निषेध होता है। क्योंकि यह अवधि भगवान विष्णु समेत समस्त देवी-देवताओं के शयन का समय होता है। इसके अतिरिक्त पौष मास भी गृह प्रवेश के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
●मंगलवार को छोड़कर अन्य सभी दिनों में गृह प्रवेश किया जाता है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में रविवार और शनिवार के दिन भी गृह प्रवेश करना वर्जित होता है।
●अमावस्या व पूर्णिमा की तिथि को छोड़कर शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि गृह प्रवेश के लिए शुभ मानी जाती है।
●गृह प्रवेश स्थिर लग्न में करना चाहिए। गृह प्रवेश के समय आपके जन्म नक्षत्र से सूर्य की स्थिति पांचवे में अशुभ, आठवें में शुभ, नौवें में अशुभ और छठवे में शुभ है।

शुक्रवार, 14 मई 05:31:14 29:31:14

शुक्रवार, 21 मई 15:23:24 29:27:26

शनिवार, 22 मई 05:26:58 14:06:43

सोमवार, 24 मई 05:26:08 09:50:08

बुधवार, 26 मई 16:45:35 25:16:10

शुक्रवार, 04 जून 05:23:05 29:23:05

शनिवार, 05 जून 05:22:57 23:28:20

गुरुवार, 10 जून 16:24:10 29:22:34

शुक्रवार, 11 जून 05:22:34 14:30:41

शनिवार, 19 जून 20:29:09 29:23:14

शनिवार, 26 जून 05:24:52 26:36:47

गुरुवार, 01 जुलाई 05:26:31 14:04:18

बुधवार, 07 जुलाई 05:28:57 27:23:00

शुक्रवार, 05 नवंबर 26:23:52 30:35:38

शनिवार, 06 नवंबर 06:36:21 23:39:39

बुधवार, 10 नवंबर 08:26:59 15:41:47

शनिवार, 20 नवंबर 06:47:15 30:47:15

सोमवार, 29 नवंबर 06:54:25 21:42:40

सोमवार, 13 दिसंबर 07:04:38 26:05:48

शुक्रवार, 31 दिसंबर 10:42:03 22:04:40

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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