कई कष्टों को दूर करता है बजरंग बाण का पाठ 

 

 

 **ज्योतिषाचार्य निधि राज त्रिपाठी के अनुसार—-बजरंग बाण का पाठ करना व्यक्ति के कई कष्टों को दूर करता है। बजरंग बाण मनोकामनाओं को पूरा तो करता है साथ ही इससे व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक शक्ति भी प्राप्त होती है। आज अपने इस लेख में हम बजरंग बाण के पाठ के महत्व और इससे मिलने वाले लाभ के बारे में चर्चा करेंगे**।

बजरंग बाण पाठ के लाभ
बजरंग बाण का पाठ यदि सच्चे मन से किया जाए तो उससे निम्नलिखित लाभ मिलते हैंl

इसके पाठ से कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके पाठ से मांगलिक दोष का असर भी कम होता है।
बजरंग बाण के पाठ से विवाह जीवन में आने वाली परेशानियां भी दूर होती हैं।
यह व्यक्ति को करियर में भी सफलता दिलाता है।
बजरंग बाण के पाठ से व्यक्ति को रोगों से भी मुक्ति मिलती है।
यदि घर में वास्तु दोष है तो उससे भी निजात मिलता है।
बजरंग बाण पाठ का महत्व
हनुमान जी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। बजरंग बाण का पाठ हनुमान जी से ही संबंधित है, इसलिए इस पाठ को जो भी भक्त करता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हालांकि इस पाठ को करने से पहले इससे जुड़े नियमों को अवश्य जान लेना चाहिए। बजरंग बाण के पाठ से नकारात्मक शक्तियों से भी छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही व्यक्ति का आत्मबल भी बजरंग बाण के पाठ से मिलता है। हनुमान जी को कलयुग में जागृत देवता माना गया है इसलिए श्रद्धापूर्वक बजरंग बाण का पाठ करना व्यक्ति की कई विपदाओं को दूर कर सकता है, इस कारण भी आज के दौर में बजरंग बाण के पाठ का महत्व बढ़ जाता है।

बजरंग बाण के पाठ से पहले इन बातों का रखें ख्याल
हनुमान जी की महिमा वाला यह पाठ करने से पहले कुछ बातों का ध्यान हर किसी को रखना चाहिए। इन बातों के बारे में नीचे बताया गया है।

इसका पाठ कभी भी किसी के अहित को ध्यान में रखकर नहीं किया जाना चाहिए।
बजरंग बाण का पाठ जब चाहे तब नहीं करना चाहिए, बल्कि जब कोई विपदा हो या किसी बड़े काम को पूर्ण करना हो तो उसके लिए बजरंग बाण का जाप करना चाहिए।
साधारण कामों की सिद्धि के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए।
यदि कार्य सफल होता है तो नियमित रूप से बजरंग बली का स्मरण करें।
बजरंग बाण के पाठ के दौरान शब्दों का उच्चारण सही तरीके से करें।

बजरंग बाण पाठ करने की विधि
यह पाठ बहुत चमत्तकारी माना जाता है। इस पाठ को मंगलवार और शनिवार के दिन करना चाहिए। बजरंग बाण का पाठ शुद्ध मन से करना चाहिए। जिस दिन भी आप बजरंग बाण का पाठ करते हैं उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान के बाद पूजा स्थल पर धूप, दीप आदि जलाकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इस पाठ को जब शुरू कर दें तो बीच में न रुकें। व्यवधानों से बचने के लिए इस पाठ को किसी एकांत जगह पर किया जाए तो बेहतर।

बजरंग बाण पाठ (Bajrang Baan Lyrics)
दोहा :

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

चौपाई :

जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥

जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥

जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥

जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥

बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥

जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥

अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥

पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥

यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥

धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

दोहा :

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।

बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

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