महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन के लिए पूजा अनुष्ठान



ज्योतिषचार्य, निधिराज त्रिपाठी:सनातन धर्म में इस साल 17 सितंबर का दिन काफी विशेष है, क्योंकि इस दिन कन्या संक्रांति, विश्वकर्मा जयंती और महालक्ष्मी व्रत मनाया जाएगा। 17 सितंबर यानी शनिवार के दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी और माँ महालक्ष्मी व्रत भी रखा जाएगा।

ये तीन त्योहार इस साल 17 सितंबर को बनाएंगे बेहद खास
महालक्ष्मी व्रत
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होती है जो कि 16 दिन तक चलते हैं। यह 16 दिवसीय व्रत माँ लक्ष्मी को समर्पित होते हैं। इस दौरान भक्त धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए 16 दिनों तक उपवास रखते हैं। इस व्रत की समाप्ति आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल महालक्ष्मी व्रत 3 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर को समाप्त होगा। इस व्रत का अंतिम दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है और भक्त इस दिन मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लेने के लिए उचित अनुष्ठान के साथ पूजा करते हैं। माँ लक्ष्मी प्रसन्न होकर भक्तों को अपार धन और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

महालक्ष्मी व्रत शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। 17 सितंबर, शनिवार को अष्टमी तिथि की शुरुआत दोपहर 2:33 बजे शुरू होगी और रविवार 18 सितंबर को शाम 4:33 बजे समाप्त होगी। यह व्रत करने का सबसे शुभ समय है।

महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन के लिए पूजा अनुष्ठान

व्रत के अंतिम दिन कलश की पूजा की जाती है। इसके लिए एक कलश में पानी, अक्षत और कुछ सिक्के भर दें।
कलश पर आम या पान के पत्ते रखते हुए, नारियल को विराजित करें।
नारियल और कलश पर सिंदूर, चंदन और हल्दी लगाएं।
कलश को देवी का प्रतीक मानते हुए उसके ऊपर नया साफ कपड़ा बांधें। इसके बाद इसकी पूजा करें।
अंत में लोगों में प्रसाद बांटकर पूजा संपन्न करें। *ज्योतिषी, अंकशास्त्री और वास्तु विशेषज्ञ*
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