जलसंसाधन विभाग के नाम पर रो रहे पट्टाधारी किसान, साहब अवैध कब्जा धारियों पर मेहरवान

 

कटनी (अवधेश यादव ),सरकार कहती है की किसी भी गरीब किसान का उनसे उनका हक नहीं छीना जाएगा लेकिन यहाँ पर अधिकारी अपनी मनमर्जी से चलते है, मामला कटनी के जलसंसाधन विभाग का है,जहाँ पर विभाग की मनमर्जी से पट्टा धारी किसान परेसान है,

 

सकरवारा जलाशय का मामला साहबों के गलत रवैया से ब्यथित किसान,

मामला बहोरीबंद तहसील की सकरवारा जलाशय का है हलाकि ये कोई पहला मामला नहीं है ,जलसंसाधन विभाग के सभी जलाशयों में साहबों की चांदी है, तो वहीँ किसान इनके नाम पर रो रहे है,दरसअल बहोरीबंद तहसील के सकरवारा जलाशय में किसानों को तलभूमि का पट्टा माननीय अनुविभागीय अधिकारी जलसंसाधन द्वारा अच्छे स्वर्ण अक्षरों से हस्ताक्षर शील मुद्रा सहित कागज को दुल्हन की तरह सजा कर कृषि करने को 35 किसानों को गेहूं की खेती करने को राशि जमा करा कर दे दिया एक तरफ भूमिहीन किसानों को एक कूबेर का खजाना मिल गया हो इतनी खुशी हुई लेकिन दुख तो तब हुआ जब संबंधित विभाग के माननीयों द्वारा कब्जा नहीं दिया गया और राशि ले ली गई तो वही किसानों ने आंखों में आसूं लिए अपनी ब्यथा सुनाते कहा कि साहबों के काले कारनामों से दबंग साहबों के शुभ चिंतक अपना अवैध कब्जा करने में सक्षम है जिससे पूरे तालाब में अवैध कब्जा की फसल लहलहाती हैं और हम गरीबों को साहब के उपयंत्री व औसियर साहब की असीम कृपा से उक्त जलाशय से पूर्णतः वंचित रखा गया है जिससे हमारा गरीब परिवार दो जून की रोटी को मोहताज है हमारे गरीब परिवारों के पेट का सहारा केवल पट्टा प्राप्त भूमि ही है
सवाल इस बात पर है कि जलसंसाधन विभाग ने पट्टेधारी किसानों के साथ इतना बड़ा जानबूझ कर छलावा क्यों आखिर इन भूखे पेट किसानों के परिवारों का जवाबदार कौन ?

साहबों की कृपा से क्यों पनप रहे अवैध कब्जाधारी 

 

वहीँ उच्च अधिकारी क्या गरीबों को न्याय दिलाने में सक्षम होंगे अब देखते हैं क्या उम्मीद करें गरीबों का कहना है यदि हमें पट्टे की भूमि पर कब्जा नहीं मिला तो परिवार सहित आन्दोलन को बाध्य होंगे जिसकी जवाबदारी प्रशासन की होगी साहब की गुस्सा से पट्टे निरस्त कर दिए जाएंगे,

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