मुखाग्नि सिर्फ पुत्र नहीं पुत्रियों का भी है अधिकार पुत्री ने किया अपने पिता का अंतिम संस्कार

 

जबलपुर। शहर के गढ़ा झारिया मोहल्ला निवासी जुगराज झारिया को उनकी पुत्री प्रज्ञा झारिया ने मुखाग्नि देकर समाज के उन लोगों के सामने एक अनूठा उदाहरण पेश किया जो यह मानते हैं कि मुखाग्नि सिर्फ पुत्रों, पुरुषों और कुटुम्ब के लोगों का अधिकार है। बाकायदा पुत्री ने पिता को कंधा दिया और चौहानी मुक्ति धाम में मुखाग्नि दी। यह देख लोगों की आंखों से आंसू रोके नहीं रुक रहे थे।

इस सम्बंध में अमित कुमार झारिया ने बताया कि बुधवार की देर रात लंबी बीमारी के बाद जुगराज झारिया का मेडिकल में निधन हो गया। आकस्मिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अगली सुबह जब अंतिम संस्कार की बात आई तो पुत्र न होने के चलते समाज के लोगों ने कुटुम्बियों से अंतिम संस्कार के लिए कहा। इस पर उनकी पुत्रियों स्वीटी और प्रज्ञा ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि तीन साल से बीमार पिता की सेवा वो कर रहीं हैं और सिर्फ पुत्र न होने की वजह से अंतिम संस्कार का हक़ किसी अन्य को दिया जाए यह गलत है। समाज के प्रतिष्ठित लोग पुत्रियों की इस बात से सहमत हुए और छोटी बेटी प्रज्ञा झारिया द्वारा अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई। प्रज्ञा ने हिन्दू रीति-रिवाज से अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से झरझर आंसू बहने लगे और लोगों ने बेटी प्रज्ञा को ढांढस भी बंधाया।

 

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