नूतन वर्ष वि.सं. 2078 प्रारंभ, गुडी पड़वा (पूरा दिन शुभ मुहूर्त)

 

 

*ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार——-नूतन वर्ष वि.सं. 2078 प्रारंभ, गुडी पड़वा (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), शालिवाहन शक 1943 प्रारंभ, ध्वजारोहण, चैत्र-वासंती नवरात्रि प्रारंभ, चेटीचंड, चन्द्र-दर्शन, हरिद्वार कुंभ स्नान**

विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।

🙏🏻 साल में ४ नवरात्रियाँ होती हैं, जिनमे से २ नवरात्रियाँ गुप्त होती हैं –
➡ चैत्र मास की रामनवमी के समय आती हैं वो ९ तिथियाँ इस साल 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से शुरू होकर 21 अप्रैल 2021 बुधवार तक रहेगी।
🙏🏻 ‘ नवरात्रियों में उपवास करते, हैं तो एक मंत्र जप करें ……..ये मंत्र वेद व्यास जी भगवान ने कहा है ….इससे श्रेष्ट अर्थ की प्राप्ति हो जाती है……दरिद्रता दूर हो जाती है । “ॐ श्रीं ह्रीं क्लिं ऐं कमल वसिन्ये स्वाहा”

🌷 नवरात्रि के दिनों में जप करने का मंत्र 🌷
👉🏻 नवरात्रि के दिनों में ‘ ॐ श्रीं ॐ ‘ का जप करें ।

🌷 चेटीचंड 🌷
🙏🏻 13 अप्रैल 2021 मंगलवार को चैत्र सुद दूज चेटीचंड पर्व है । उस दिन शाम को आकाश में चन्द्रमा दिखे दूज का चाँद शुक्ल पक्ष का, चैत्र सुद दूज ।
🌙 तो उस दिन रात को चंद्रमा को अर्घ्य दें … कि मेरा मन शांत रहे, भक्ति में लगे, ऐसा भी करें और
🌙 “ॐ बालचन्द्रमसे नमः |” ” ॐ बालचन्द्रमसे नमः|” ” ॐ बालचन्द्रमसे नमः | ” ऐसा बोलते हुए अर्घ्य दें । और मेरा मन भक्ति में लगे, ऐसा शुभ संकल्प करें ।

🌷 विद्यार्थी के लिए 🌷
🔥 नवरात्रि के दिनों में खीर की २१ या ५१ आहुति गायत्री मंत्र बोलते हुए दें । इससे विद्यार्थी को बड़ा लाभ होगा।

चैत्र मास के नवरात्र का आरंभ 13 अप्रैल, मंगलवार से हो रहा है। नवरात्रि में रोज देवी को अलग-अलग भोग लगाने से तथा बाद में इन चीजों का दान करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। जानिए नवरात्रि में किस तिथि को देवी को क्या भोग लगाएं-
🙏🏻 प्रतिपदा तिथि (नवरात्र के पहले दिन) पर माता को घी का ।भोग लगाएं ।इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा शरीर निरोगी होता है

🌷 चैत्र नवरात्रि 🌷
🙏🏻 चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक वासंतिक नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार वासंतिक नवरात्रि का प्रारंभ 13 अप्रैल, मंगलवार से हो रहा है, धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप का पूजन करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती हैं । जानिए नवरात्रि में किस दिन देवी के कौन से स्वरूप की पूजा करें-
🌷 हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री 🌷
चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं व योग साधना करते हैं।
🙏🏻 **हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सर्वप्रथम है। इसलिए इस दिन हमें अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए माता शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए। शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी हैं । स्त्रियों के लिएउनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।**

मेरे बताएं यह उपाय हर किसी के ऊपर लागू नहीं होते हैं सबसे पहले कुंडली का निरीक्षण कर ले और जब आपकी कुंडली अनुकूल हो तो ही मेरे बताएं उपाय आप अपनाएं **लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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