हिन्दू नव वर्ष के साथ प्रकृति ने बदला अपना स्वरूप

 

हिन्दू नव वर्ष 2078 के साथ चैत्र नवरात्रि की सुरूवात

कोयल की कूक से और नए पुष्पो की सुगंध लोगों को प्रकृति के बेहद करीब ले जा रही है  गौरतलब है की चैत्र मास आते ही पेड़ो में नए पत्तो के साथ पेड़ो में नए फूल खिलना चारों तरफ हरियाली का आ जाना मानों प्रकृति भी नव वर्ष मना रही हो यदि देखा जाये तो इस नव वर्ष के सुरु होते ही सब कुछ नया हो जाता है स्कूलों के रिजल्ट के साथ नए सत्र की सुरुवात होती है तो बैंको में क्लोजिंग खत्म कर नया खाता बही खोले जाते है वहीँ देखा जाये तो जनवरी में तो कलेंडर बदलता है लेकिन इस महीने तो पूरा पंचांग ही बदल जाता है वो पंचांग जिसके अनुसार लोग शादी विवाह जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते है,यदि इतिहासिक और पौराणिक द्रष्टी से देखा जाये तो इस दिन ही ब्रम्हा जी ने नई सृष्टी का निर्माण किया था वहीँ इसी दिन राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम सवंत की सुरुवात की गई थी इसी दिन सिंधियों के भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था जिसको लेकर आज भी सिंधी समाज चेटीचंड महोत्सव मनाता है,इस दिन ब्रहांड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा मौषम फसल बिद्यार्थियों की नई कक्षा मनुष्य में नया रक्त संचार आदि परिवर्तन होते है जो की विज्ञान आधारित है

शेयर करें: