सर्प के काटने व काल सर्प दोष से मिलती है मुक्ति ,110 वर्ष पुराना है कुआँ का शेषनाग मंदिर

कटनी/स्लीमनाबाद(सुग्रीव यादव): सावन का महीना शिव जी का प्रिय महीना होता है। इस महीने में कई प्रमुख त्योहार पड़ते हैं। इन त्योहारों पर शिव जी परिवार के साथ भगवान शंकर के परम भक्त नाग देवता की पूजा की जाती है। इसे नाग पंचमी कहते हैं। नाग पचंमी का त्योहार सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानि मंगलवार को मनाया जाएगा।नागपंचमी पर अपनी आस्था रखने वाले जिले के इकलौते शेषनाग मंदिर जो बहोरीबंद विकासखण्ड की ग्राम पंचायत कुआँ मैं स्थित है जो अपने अद्भुत रहस्यों को आज भी संजोय रखे हुए है ।यहां तो वैसे प्रतिदिन जिसे सर्प काटता है वो मंदिर पहुँचकर पूजा अर्चना करते है लेकिन नागपंचमी के दिन प्रदेश के कई जिलों से लोग पहुँचते है व काल सर्प दोष मुक्ति के लिए पूजा अर्चना करते है।

110 वर्ष पुराना है मंदिर-

शेषनाग मंदिर के पुजारी राममिलन नायक ने बताया कि कुआँ स्थित शेषनाग मंदिर जिले का इकलौता शेषनाग मंदिर है।यहां सर्प काटने वाले बड़ी संख्या मे पहुँचते है जो पूजा अर्चना करने से ठीक हो जाते है।साथ ही जिन्हें काल सर्प दोष होता है उन्हें भी इससे मुक्ति मिलती है।
वैसे तो प्रतिदिन लोगो का आना जाना मंदिर मे लगा रहता है।लेकिन नागपंचमी पर प्रदेश के कई जिलों से लोग अपनी मन्नतों को लेकर पहुँचते है।
जो पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना करते है।
साथ ही काल सर्प दोष निवारण के लिए मंदिर मे पूजन अर्चना होगी।शेषनाग मंदिर पहुँचने के लिए बहोरीबंद व सिहोरा मार्ग से वाहन आते है।जो सीधे कुआँ ग्राम पहुँचते है।

काल सर्प दोष से मिलती है मुक्ति-

नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा अर्चना कर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।नाग पंचमी के दिन तहसील क्षेत्र मे अलसुबह से लोग नाग देवता की पूजा अर्चना करने के साथ ही सांपों को दुध अर्पित करेंगे।पंडित रमाकान्त पौराणिक ने बताया कि इस साल नाग पंचमी के दिन मंगला गौरी व्रत का संयोग बन रहा है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शंकर की कृपा से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

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