झारिया/मेहरा कल्याण संघ ने बन्द किया मृत्यु भोज

 

जबलपुर। प्रज्ञा द्वारा पिता को मुखाग्नि देने के बाद झारिया समाज में अमूलचूक परिवर्तन देखने मिला है। इसी क्रम में झारिया/मेहरा कल्याण संघ गढ़ा ने मृत्यु पश्चात सामाजिक भोज बन्द करने का निर्णय लिया है।
इस सम्बंध में झारिया/मेहरा कल्याण संघ अध्यक्ष रामलाल झारिया ने बताया कि समाज में किसी की मृत्यु पश्चात तेरहवीं का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी सामाजिक लोगों को भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। समाज घृणित नजरों से न देखे और सामाजिक बहिष्कार न हो इस डर से वर्षों से चली आ रही इस परम्परा का निर्वहन उन परिवारों को भी करना पड़ता है जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती। कई बार मृतक के परिवार की गुंजाइश न होने के बाद भी कर्ज लेकर उन्हें इस परम्परा का निर्वहन करना पड़ता है।
रतनलाल झारिया ने अपना मत देते हुए कहा कि पहले की बात अलग थी क्योंकि उस समय अधिकतर लोग शासकीय सेवक थे। अब हालात एकदम विपरीत हैं सरकारी नौकरी तो दूर की बात लोगों को प्राइवेट जॉब नहीं मिल पा रहा। ऐसे में अगर किसी के घर में मृत्यु हो जाए तो वह अंतिम संस्कार और सामाजिक भोज की व्यवस्था करे या फिर अपने परिवार के भरण पोषण पर ध्यान दे। यही सब बातें ध्यान में रखते हुए झारिया/मेहरा कल्याण संघ ने मृत्यु भोज बन्द करने का निर्णय लिया है।
उल्लेखनीय है कि प्रज्ञा के पिता की मृत्यु पश्चात उनके घर में काम करने वाला कोई नहीं है। ऐसे हालातों में उनके द्वारा समाज को भोज कराना संभव नहीं है।

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