मंहगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट,पेट्रोल- डीजल गैस के रेट से लोगों को बढ़ी टेंशन

जबलपुर:सखी सईंया तो खूब ही कमात है मंहगाई डायन खाये जात है…… ये गीत ज्यादा पुराना नहीं है,ये गीत साल 2010 में आई फ़िल्म पीपली लाइव का है ,जिसमे मंहगाई को लेकर यह गीत गाया गया,तो आज जहां एक ओर देश की जनता पेट्रोल-डीजल की दामों से त्रस्त है, वहीं अब सरकार ने घरों की रसोई तक भी टेंशन बढ़ा दी है। घरेलू गैस सिलेंडर्स पर दाम बढ़ाकर लोगों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। गत 2 दिसंबर को 14 किलो घरेलू गैस सिलेंडर की दर 601 रुपए थी, जो एक महीने बाद बढ़कर जनवरी में 701 रुपए हो गई गई है। तथा 4 फरवरी एवं 15 फरवरी को क्रमशः ₹25 एवं ₹50 बढ़कर 776 रुपए तक पहुंच गई है।

मध्यवर्गीय परिवार पर आर्थिक बोझ

सरकार की ओर से बढ़ती महंगाई पर अंकुश नही रखे जाने से मध्यमवर्गीय परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बीते सात माह से तो गैस सिलेंडरों की कीमतों में आग लगी हुई है। व्यवसायिक गैस सिलेण्डर की कीमत में तो जनवरी से फरवरी माह में करीब100 रुपए की वृद्धि ने कमर ही तोड़ दी। गैस सिलेंण्डर की कीमत में भी हर माह बढ़ोतरी की जा रही है।

सात माह में बढ़े इतने बढ़े दाम

रसाई गैस सिलेंडरों की दरों में पिछले सात महीनों से लगातार वृद्धि की जा रही है। अगस्त माह की बात की जाएं तो 14 किलो रसाई गैस सिलेेंडर की दर 584.50 रुपए थी। अब फरवरी में माह में बढ़कर 776 रुपए तक पहुंच गई है। अगस्त माह से फरवरी तक घरेलू सिलेंडर पर 281 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। इससे घरों व छोटे दुकानदारों का बजट बिगड़ गया है।

गैस की बचत में लगी गृहणियां

रसाई गैस सिलेंंडर के दाम बढऩे से अब महिलाएं भी रसोई में काम करते समय गैस को लेकर एहतियात बरतने लगी है महंगाई की मार से त्रस्त आम आदमी के रसोई का बजट गैस सिलेंडर पर पिछले ढाई महीने मैं 175 रुपये बढ़ने से और बिगड़ गया है। सिलेंडर की पुरानी कीमत लेकर गोदाम पहुंचने वाले ग्राहक नए दाम सुनकर परेशान हो गए हैं।

गृहिणी उमा उपाध्याय ने बताया कि अभी तक सब्जी के दाम आसमान छू रहे थे अब 15 दिन में रसोई गैस पर75 रुपये बढ़ गए हैं। बढ़ती महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ दी है।

 

 

ललिता यादव और प्रीति दुबे ने बताया कि जनता पहले से ही आलू, प्याज व हरी सब्जियों के दाम से परेशान थी और अब सिलेंडर के बढ़ते रेट से किचन का बजट बिगड़ गया है।


शिक्षिका सपना गौतम ने बताया कि सरकार का पेट्रोलियम पदार्थों पर नियंत्रण ना होने के कारण रसोई गैस एवं पेट्रोल के दामों ने मध्यम वर्गीय परिवार के समक्ष आर्थिक विषमता पैदा कर दी है।

 

अप डाउनर्स सौरभ सिंह ठाकुर ने बताया कि कोरोना काल में रेल सुविधा बंद होने के कारण जबलपुर अप डाउन इतना महंगा हो गया कि जितनी मजदूरी मिलती है वह पेट्रोल में ही खर्च हो जाती हैं।

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