जेठ के महीने में इस वस्तु को बताया गया है निषेध, ज्यादा सेवन से बिगड़ सकती है सेहत

 

*ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार———-**

**ज्येष्ठ का महीना भीषण गर्मी वाला होता है. इसमें पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है. ऐसे में इस महीने में मसालेदार भोजन और लाल मिर्च के सेवन से बचना बताया गया है.**
**जेठ के महीने में इस वस्तु को बताया गया है निषेध, ज्यादा सेवन से बिगड़ सकती है सेहत**
ज्येष्ठ का महीना भीषण गर्मी वाला होता है. इसमें पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है. ऐसे में इस महीने में मसालेदार भोजन और लाल मिर्च के सेवन से बचना बताया गया है.
जेठ के महीने में इस वस्तु को बताया गया है निषेध, ज्यादा सेवन से बिगड़ सकती है सेहत
लाल मिर्च

भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष एवं आयुर्वेद जैसे विषयों से गुथी है. इन्हें संयुक्त रूप से जनमानस प्रभावशाली माना जाता है. ज्योतिष के विभिन्न उपाय आयुर्वेद पर निर्भर होते हैं. ज्योतिष में व्रत खानपान दान का विशेष महत्व होता है. ज्येष्ठ का महीना 27 मई से 24 जून 2021 तक है. ज्येष्ठ माह को स्थानीय भाषा में जेठ का महीना भी बुलाया जाता है.

इस माह में दिन सबसे बड़े होते हैं. सूर्य के ताप से गर्मी की प्रबलता रहती है. इस माह में पाचन तंत्र कमजोर होने और ताप की प्रबलता से लाल मिर्च का परहेज बताया गया है. साथ ही इस माह में दोपहर में यात्रा करने को निषेध माना गया है. लाल मिर्च के स्थान पर हरी मिर्च का सेवन न्यून मात्रा में किया जा सकता है. साथ ही बेल का सेवन इस माह में महत्वपूर्ण माना गया है.

लाल मिर्च के साथ प्रयास किया जाना चाहिए कि अत्यधिक गरिष्ठ और मसालेयुक्त भोजन ज्येष्ठ माह में न किया जाए. इनके सेवन से पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं उभर सकती हैं. शरीर में उष्णता बढ़ाने वाले तत्वों की मात्रा बढ़ने से अचानक चक्कर आने और घबराहट होने की समस्या हो सकती है. पेट बिगड़ सकता है. पाचन तंत्र से जुड़े पुराने रोग उभर सकते हैं.

ज्येष्ठ माह में सुबह का पहला भोजन जल्द से जल्द कर लेने के लिए भी कहा गया है. रसदार फलों और जूस का सेवन उचित माना गया है. ज्येष्ठ में लिक्विड डाइट पर रहना भारी भोजन से अच्छा बताया गया है. दिन बड़ा होने से रात्रि भोजन से भी बचना चाहिए. सूर्यास्त से सूर्याेदय तक भोजन कर लेना चाहिए. इसके उपरांत दूध इत्यादि सीमित मात्रा में लिया जा सकता है. इस माह में संतुलित मात्रा में घी का सेवन श्रेयष्कर माना गया है.
।।  ऊँ सूर्याय नम:।।निधिवन ज्योतिष एवं वास्तु केन्द्र
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(खगोलीय ग्रह गणना चक्रम्)
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