सिहोरा में खेत में खरीदी के लिए रखा गेंहू पानी -पानी किसकी लापरवाही की भेंट चढ़ गया? कौन है इसका जिम्मेदार?देखें वीडियो

 

जबलपुर :सरकार ने हर खरीदी केंद्रों पर उपार्जन की बेहतर व्यवस्था के तमाम दावे तो किये लेकिन एक ही बरसात ने सरकारी दावों और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी ,मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के बेला खरीदी केंद्र के अन्नपूर्णा वेयर हाउस का है ,कहने को तो इस वेयर में सर्वसुविधा युक्त खरीदी केंद्र बनाया गया था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है, पक्की सड़क से लगभग 300 मीटर अंदर खेत मे बने इस वेयर हाउस तक जाने के लिए ऊबड़खाबड़ रास्ते से किसानों को अपने वाहन ले जाना मजबूरी थी और वेयर हाउस के चारो तरफ लगे काली मिट्टी के गहरे खेत मे गेंहू की तौल की जा रही थी लेकिन जैसे ही पानी गिरा ये सब खेत लभालभ भर गए और खेत के अंदर तौल के लिए रखा किसानों का अधिकांश अनाज बर्बाद हो गया ,अब जो बचा है पूरी तरह भीग चुका है ,लेकिन खरीदी कर रहे वेयर हाउस के संचालक द्वारा अब आनन -फानन में पूरी तरह भीग चुके गेंहू की तौल कर लीपापोती की जा रही है, ऐसे में सवाल उठता है की प्रशासन के नियम कानून मानक और अमानक अब इस भीगे गेंहू में लागू नहीं होते क्या ?

 

 

खेत में खरीदी के लिए रखा गेंहू पानी -पानी कौन है जिम्मेदार ?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक सिहोरा अनुभाग अंतर्गत बेला सोसाइटी के उपार्जन केंद्र अन्नपूर्णा वेयरहाउस में वेयर हाउस के मालिक सहित प्रशासनिक लापरवाही के चलते अनेक किसानों की उपज ना केवल भीग गई बल्कि लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण दुर्गंध मार रही है उल्लेखनीय है कि इस बार रवि फसल की गेहूं खरीदी के लिए गोदाम स्तरीय उपार्जन केंद्रों को प्राथमिकता दी गई थी ताकि जल्द से जल्द किसानों की गेंहू की खरीद की जा सके तथा माल को गोदामो में जमा कराया जा सके। लेकिन गेहूं खरीदी में वारदाने की कमी के साथ गेहूँ परिवहन उपार्जन केंद्र की अव्यवस्था की बजह से केंद्र पर हजारो क्वन्टल गेंहू खुले में पड़ा हुआ है, गोदाम स्तरीय केंद्रों की हालत ओर ज्यादा खराब है, जबकि किसान का गेंहू खरीद कर माल को सिर्फ गोदाम में जमा करना होता है उसके बाबजूद भी गोदाम स्तरीय केन्द्रों पर हजारो क्वन्टल गेंहू उठाव के लिए पड़ा है वही मौसम के बिगड़े मिजाज से समिति तथा गोदाम स्तरीय केन्द्रों पर पड़ा हजारो क्वन्टल गेंहू भीग गया और खराब होने की कगार पर है। जिससे किसानों का नुकसान होने के साथ साथ भुगतान पर खतरा मंडरा रहा है ,

*खेत में बना दिया उपार्जन केंद्र*
प्राप्त जानकारी के अनुसार वेला सोसाइटी का उपार्जन केंद्र अन्नपूर्णा वेयरहाउस में बनाया गया था अव्यवस्थाओं के चलते समिति प्रबंधक द्वारा किसानों का गेहूं खेतों में डंप करा दिया गया बारिश के दौरान खेतों में पानी भर जाने के साथ भरे पानी की निकासी ना होने के कारण डंप हुआ गेहूं पूरी तरह भीग गया।

*वारदाने की कमी भी बना कारण*
बेला सोसाइटी अंतर्गत उपार्जन केंद्र की खरीदी का लक्ष्य 1लाख 33 हजार कुंटल का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से लगभग 1 लाख कुंटल की खरीदी का भंडारण किया जा चुका है किंतु बार दाने की कमी के चलते लगभग आठ -दस हजार क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे खेतों में डंप पड़ा था वही एस एम एस ना आने के कारण कुछ किसान अपनी उपज लेकर केंद्र तक नहीं पहुंचे हैं।

*अव्यवस्थाओं का किया निरीक्षण*
खरीदी केंद्र में पानी भरने की शिकायत पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने आनन-फानन में मानक अमानक को दरकिनार करते हुए भीगे एवं सड़े गेहूं की तोल प्रारंभ कराई गई इस अवसर पर तहसीलदार सिहोरा राकेश चौरसिया फूड इंस्पेक्टर मीनाक्षी दुबे, भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष एडवोकेट रमेश पटेल, पटवारी अमित कुररिया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
किसानो का कहना है घुटना निवासी जसवीर कोर के पुत्र रमनदीप का कहना है कि 21 मई को एस एम एस प्राप्त होने पर वह 300 क्विंटल उपज लेकर आया था किंतु बार दाने की कमी के चलते उसकी तोल नहीं हो सकी और बारिश में गेहूं पानी में डूब गया। लगभग 20 क्विंटल क्या है मिट्टी में मिल गया,

क्या कहा किसानों ने ?

तो वहीँ किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि वह 170 कुंटल गेहूं लेकर आया था पानी में भीग जाने के कारण ऊपर ऊपर की गेहूं की तौल लगभग 110 क्विंटल की हुई है 6 गए शेष गेहूँ खराब हो गया।अब ऐसे में सवाल उठता है की असमय हुई बरसात से केंद्र में तौल के लिए रखे गेंहू के खराब होने की जबाबदारी किसकी होगी तो वहीँ सूत्रों की मानें तो इस खरीदी केंद्र में वेयर हाउस के मालिक ने गेंहू की खरीदी की है, अब देखना होगा की प्रशासन किसको लापरवाही की सजा देता है?या इस मामले को ठंडा कर दिया जाएगा ?

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