सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का महत्व,और पूजन विधि 

**ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार———-**
**सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इस पर्व से महिलाओं के पति की आयु लंबी होती है। उत्तर भारत में सुहागन महिलाएं इस पर्व को बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाती हैं। हालांकि यह पर्व सुहागन महिलाओं का है लेकिन इसे कुंवारी और विधवा महिलाएं भी मना सकती हैं। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि सावित्री नामक पतिव्रता स्त्री ने यमराज से अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवित करवाया था।**

प्रत्येक वर्ष यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ता है। ऐसे में हम आपको इस लेख में वट सावित्री व्रत की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी देंगे।
**वट सावित्री व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त**
तिथि : 10 जून, 2021

दिन : गुरुवार

अमावस्या प्रारम्भ : 09 जून, 2021 को 14 बजकर 25 सेकंड से

अमावस्या समापन : 10 जून 2021 को 16 बजकर 24 मिनट और 10 सेकंड पर

पारण की तिथि : 11 जून 2021

पारण का दिन : शुक्रवार

वट सावित्री पूजा विधि
इस दिन सुबह महिलाओं को जल्दी उठा कर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और सम्पूर्ण श्रृंगार करें। इसके बाद एक बांस या फिर पीतल की टोकड़ी में पूजा का सारा सामान रख लें। सबसे पहले घर में पूजा करें। घर में पूजा के बाद भगवान सूर्य को लाल पुष्प के साथ तांबे के किसी पात्र से अर्घ्य देंl

इसके बाद घर से नजदीक वट वृक्ष पर जाएँ। वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद देवी सावित्री को वस्त्र और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। वट वृक्ष को फल व पुष्प अर्पित करें। इसके बाद कुछ देर वट वृक्ष को पंखा झेलें। इसके बाद रोली से वट वृक्ष की परिक्रमा करें। परिक्रमा करने के बाद सत्यवान-सावित्री की कथा का पाठ करें। साथ ही पूरे दिन व्रत रखें।
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