यदि आप कर्ज से परेसान है तो जरूर पढ़ें ये खबर

 

*ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार——-वैसे तो कभी न कभी कर्ज की जरूरत हर मध्यम वर्ग को पड़ती है**।धन ऐसी मूलभूत अवश्यकता है, जिसके अभाव में जीवनयापन करना असंभव है। अवश्यकता पड़ने पर किसी से उधार लेना या किसी की जरूरत के समय उसे उधार देना आम बात है| पिछले दिनों ब्याज पर पैसा लेने वाले कई व्यापारियों ने सूदखोरों से तंग आकर अपनी जान दे दी। वास्तव में ऋण लेना और देना दोनों ही काफी जोखिम के काम हैं। कर्ज लेना किसी को अच्छा नहीं लगता, लेकिन हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं होती कि वह एक साथ रुपए खर्च कर सके। इसीलिए बरसों से हमारे यहां कर्ज लेने की प्रथा रही है। जो लोग सक्षम हैं, उनसे कर्ज लेना अब पुरानी बात हो गई। आजकल बैंक के माध्यम से यह काम बखूबी हो जाता है। बैंक भी वसूली करती है। यानी कर्ज तो चुकाना पड़ता ही है।

कुछ ऐसे ग्रह नक्षत्र होते हैं, जिनमें पैसा लेना और देना दोनों नुकसानदायक हैं। वैसे तो हर व्यक्ति अपने आय दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए कभी न कभी कर्ज जरूर लेता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह हो जाती है कि वह कर्ज कैसे और कब चुकाया जाए. जब कोई इंसान किसी काम को करने के लिए कर्ज लेता है तो उस वक्त तो उसे बड़ा अच्छा महसूस होता है लेकिन जब बात आती है उसे चुकाने की तो उसकी परेशानियां पहले से ज्यादा बढ़ जाती हैं. कर्ज लेना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका कोई अंत नहीं है लेकिन कुछ ऐसे भी दिन है जिस दिन यदि आप अपना कर्ज चुकाते हैं तो वह आपके हित में होगा. कर्ज के लेन-देन में वार का विशेष महत्व होता है. यदि व्यक्ति को किसी कारणवश कर्ज लेना पड़े तो वार देखकर लेना हितकर रहेगा.कुछ द‌िन और समय तो ऐसे होते हैं जब धन का आदान-प्रदान किया जाए तो उनके वापस म‌िलने की संभावना खत्म हो जाती है।। आइए ज्योतिषाचार्य निधिराज त्रिपाठी से जानते हैं ऋण लेने और देने से पूर्व किन बातों का ध्यान रखें-

—-सोमवार- सोमवार को कर्ज के लेन-देन के हिसाब से काफी शुभ माना गया है. इस वार कि अधिष्ठाता साक्षात माता पार्वती को माना गया है. यह चर संज्ञक और शुभ वार है. इस वार को किसी भी प्रकार का कर्ज लेने-देने में हानि नहीं होती है.
मंगलवार को कर्ज लेने से धन की हानि होती है और आर्थ‌िक अभावों से गुजरना पड़ता है। इस दिन लिया गया उधार दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहता है लेकिन चुकाया गया कर्ज शुभता लेकर आता है।इस वार के अधिष्ठाता कार्तिकेय हैं, जिन्हें काफी उग्र एवं क्रूर माना जाता है. इस वार को कर्ज लेना शास्त्रों में निषेध बताया गया है. इस दिन कर्ज लेने के बजाए पुराना कर्ज हो तो चुका देना चाहिए.

बुधवार का दिन राजकुमार बुध को समर्पित है। जिनके शुभ और अशुभ प्रभाव से व्यापार और धन प्रभावित होता है। इस दिन कर्ज और उधार देने वाले व्यक्ति का कभी मंगल नहीं हो सकता।बुधवार के देवता विष्णु हैं और यह मिश्र संज्ञक शुभ वार है. इस वार को ज्योतिष की भाषा में नपुंसक वार माना गया है. यह गणेशजी का भी वार है इसलिए इस दिन कर्ज लेने से बचना चाहिए | यदि कर्ज से छुटकारा नहीं हो रहा हो तो प्रत्येक बुधवार को गणेशजी के सम्मुख तीन बार ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ करें और यथाशक्ति पूजन करें.
——गुरुवार– इस दिन का देवता ब्रह्मा को माना गया है इसलिए दिन को लघु संज्ञक शुभ वार माना जाता है. गुरुवार को किसी को भी कर्ज नहीं देना चाहिए, लेकिन इस दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्दी उतरता है.
——शुक्रवार- शुक्रवार के अधिष्ठाता देवराज इन्द्र को माना गया है. यह मृदु संज्ञक और सौम्य वार है, जो कर्ज लेने और कर्ज देने दोनों के लिए शुभ माना जाता है.
शन‌िवार को लिया गया उधार जल्दी चुकता हो जाता है।शनिवार के अधिष्ठाता देव साक्षात काल हैं. यह दारुण संज्ञक क्रूर वार है. स्थिर कार्य करने के लिए ठीक है, परंतु कर्ज के लेन-देन के लिए ठीक नहीं है. इस दिन कर्ज लेने से कर्ज विलंब से चुकता है और कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है.

रविवार को सप्ताह का आरंभ होता है और ये दिन ऋणहर्ता भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है। इस दिन पैसों का लेन-देन करना अशुभ होता है। उधार चुकाने में बहुत सारी समस्याएं आती हैं।रविवार के देवता भगवान शिव हैं. इस वार को स्थिर संज्ञक और क्रूर वार भी माना जाता है. रविवार को न तो कर्ज देना चाहिए और न ही लेना चाहिए |

सूर्य का राश‌ि परिवर्तन यानी संक्रांत‌ि को पैसे के लेन देन से बचना चाहिए।
—–चर लग्न जैसे-मेष, कर्क, तुला व मकर में कर्ज लेने पर शीघ्र उतर जाता है। लेकिन, चर लग्न में कर्जा दें नहीं। चर लग्न में पांचवें व नौवें स्थान में शुभ ग्रह व आठवें स्थान में कोई भी ग्रह नहीं हो, वरना ऋण पर ऋण चढ़ता चला जाएगा।
भूलकर भी हस्त नक्षत्र में कर्ज न लें लेकिन चुकाना समृद्धि और सौभाग्य लाता है।किसी भी महीने की कृष्ण पक्ष की 1 तिथि, शुक्ल पक्ष की 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13, पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।
——कर्ज लेने जाते समय घर से निकलते वक्त जो स्वर चल रहा हो, उस समय वही पांव बाहर निकालें तो कार्य
सिद्धि होती है, परंतु कर्ज देते समय सूर्य स्वर को शुभकारी माना है।
वृद्ध‌ि योग में जो भी काम किया जाए उसमें बढ़ौतरी होती है। कर्ज लेने से बढ़ता है और चुकाने पर स्वयं के धन में धन की देवी लक्ष्मी कृपा करती हैं।

कर्ज से मुक्ति के उपाय—

यहाँ पर हम शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कर्ज लेने व देने संबंधी कुछ आसान से उपाय बता रहे है इन पर अमल करने पर निश्चित ही आपका कर्ज, बिलकुल समय से सुविधानुसार आपके सिर से उतर जाएगा।

— करें इन कर्जा मुक्ति मन्त्र के जाप—
1 – “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”
2 – “ॐ मंगलमूर्तये नमः।”
3 – “ॐ गं ऋणहर्तायै नमः।”
इनमे से किसी भी मन्त्र के नित्य कम से कम एक माला के जप से व्यक्ति को अति शीघ्र कर्जे से मुक्ति मिलती है ।

बैंक के फिक्स डिपाजिट करने के लिए तथा बैंक में खाता खोलने के लिए नीचे दिए गए मुहूर्तों को उत्तम माना जाता है। जीवन बीमा तथा वस्तुओं के बीमा के लिए भी इन्हीं मुहूर्तों में ही आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करना अच्छा होता है। कृष्णपक्ष की द्वितीया, तृतीया, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी तथा एकादशी, द्वादशी तिथियों तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया, तृतीया, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी तथा त्रयोदशी तिथि हो तथा इन तिथियों में सोमवार, वीरवार या शनिवार हो साथ ही अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा तथा रेवती आदि में से कोई भी एक नक्षत्र हो तो ऐसे मुहूर्त में जोड़ा गया धन शुभ परिणाम देता है।

ब्याज कमाने के उद्देश्य से जब कोई व्यक्ति, संस्था या साहूकार रुपया उधार देता है तब उसे भी कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, उभयपक्षों की द्वितीया, तृतीया, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी तथा शुक्लपक्ष की त्रयोदशी एव पूर्णिमा तिथि का ही उपयोग करना चाहिए। उपरोक्त तिथियों में अश्विनी, पुनर्वसु, चित्रा, अनुराधा, मृगशिरा, पुष्य, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा तथा रेवती आदि में से कोई एक नक्षत्र हो तो बहुत ही अच्छा माना जाता है। शनिवार, वीरवार, शुक्रवार तथा सोमवार का दिन उधार या ऋण देने के लिए अच्छा माना जाता है।

धन के लेन-देन, जमा संग्रह आदि के लिए मंगलवार, संक्रांति का दिन, संक्रांति युक्त रविवार का दिन, मूल, आद्र्रा, ज्येष्ठा, विशाखा, कृत्तिका, धु्रवसंज्ञक नक्षत्र अर्थात उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा तथा उत्तराभाद्रपद एवं रोहिणी आदि नक्षत्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

मेरे बताएं यह उपाय हर किसी के ऊपर लागू नहीं होते हैं सबसे पहले कुंडली का निरीक्षण कर ले और जब आपकी कुंडली अनुकूल हो तो ही मेरे बताएं उपाय आप अपनाएं **लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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