कैसे और क्यों हो बच्चों का नामकरण ?

ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी अनुसार——-👶🏻 *नामकरण क्यों और कैसे हो ?*

*नामकरण संस्कार में बच्चे को शहद चटाकर भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कराये जाते हैं और शुभ संकल्प किया जाता है कि ‘बालक सूर्य की प्रखरता, तेजस्विता धारण करें |’ इसके साथ ही भूमि को नमन करके देव-संस्कृति के प्रति श्रद्धापूर्वक समर्पण किया जाता है | बच्चे का नाम रखकर सब लोग उसके चिंरजीवी, धर्मवान, स्वस्थ एवं लौकिक, आध्यात्मिक – सर्व प्रकार से उन्नतिशील होने, समृद्ध होने का सदभाव करते हैं |*

*मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जिस तरह के नाम से व्यक्ति को पुकारा जाता है, उसे उसी प्रकार के गुणों की अनुभूति होती है | अत: नाम की सार्थकता समझते हुए ऐसा नाम रखना चाहिए जिससे आगे चलकर बालक को लगे कि मुझे बड़े होकर मेरे नाम के गुणानुसार बनना है |*

*हमारे लाडलों के नाम कैसे हों : “बालक का नाम ऐसा पवित्र रखो कि पवित्र भगवान का सुमिरन हो | आजकल लोग बच्चों के नाम गजब के रखते हैं | लडकियों के नाम रखते हैं – लेष्मा, श्लेष्मा…. अब श्लेष्मा तो नाक से निकली हुई गंदगी को बोलते हैं | लडकों के नाम रखते हैं – टिन्नू, मिन्नू, बंकी, विक्की, पुम्बू…. ये कोई नाम हैं | अभिनेत्रियों के नाम लडकियों के रखेंगे, अभिनेताओं के नाम लडकों के रखेंगे – यह तो बहुत हो गया | वे बेचारे अंदर से खुद ही अशांत हैं तो अपने बच्चों को उनके नाम से क्या शांति मिलेगी, क्या ज्ञान मिलेगा ?*

*अरे हरिदास रखो, गोविन्द, अम्बादास, हरिप्रसाद, शिवप्रसाद ….. भगवान की स्मृति आये ऐसे नाम रखो | अभिनेता के नाम रखोगे तो लड़का अभिनेता जैसा होगा और भक्तों व भगवान के नाम रखोगे तो कुछ तो नाम का भी प्रभाव पड़ेगा उसके चित्त पर | ‘रावण’ नाम नहीं रखते, किसका नाम ‘रावण’ रखे तो कैसा मन हो जाय ? रावण, कुम्भकर्ण, हिटलर नाम नहीं रखते, अच्छे – अच्छे नाम रखते हैं |*

*ऐसी ही लेष्मा-श्लेष्मा नाम रखते हैं बेचारी कन्याओं के, उन्होंने क्या अपराध किया ?सावित्री, गार्गी, अनसूया, मदालसा, अम्बा, अम्बिका नाम रख दें अपनी कन्या का…. शबरी नाम रख दें तो भक्त शबरी की याद या जायेगी, भगवान श्रीरामजी की याद आ जायेगी | स्वयंप्रभा, सुलभा, ज्योति, सीता, पार्वती रख दें ….. ऐसे-ऐसे और भी कई पावन-पवित्र नाम हैं | चिंता न करें कि नाम कम पड़ जायेंगे | भारत के ऋषियों ने श्रीविष्णुसहस्रनाम, श्रीशिवसहस्रनाम, श्रीदुर्गासहस्रनाम आदि की रचना करके आपके लिए भगवन्नामों का भंडार खोल रखा है अपने सत्शास्त्रों में | तो ऐसे पवित्र-पावन नाम रखो ताकि भगवान की स्मृति आ जाय | और बच्चों में दैवी गुण आ जायें तथा माता-पिता में उच्च विचार आ जायें |*

मेरे बताएं यह उपाय हर किसी के ऊपर लागू नहीं होते हैं सबसे पहले कुंडली का निरीक्षण कर ले और जब आपकी कुंडली अनुकूल हो तो ही मेरे बताएं उपाय आप अपनाएं **लेकिन, यदि आपके मन में कोई और दुविधा है या इस संदर्भ में आप और ज्यादा विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ज्योतिष व वास्तु के लिए सम्पर्क करे* **ज्योतिषचार्य निधिराज त्रिपाठी** अगर आपको ग्रह दशा के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमें +91-9302409892 पर कॉल करें। या आप हमें
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो हर व्यक्ति का जन्म होते ही वह अपने प्रारब्ध के चक्र से बंध जाता है और ज्योतिषशास्त्र द्वारा निर्मित जन्म कुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है। हमारे जीवन में सभी घटनाएं बारह राशि व नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं। इन ग्रहों का आपके जीवन पर आने वाले समय में कैसा प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में विस्तृत जवाब जानने के लिए अभी आप भी कर्ज़ की समस्या से परेशान हैं, और उससे जुड़ा कोई व्यक्तिगत उपाय, निवारण जानना चाहते हों या इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब चाहिए हो तो
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