मित्रता दिवस विशेष,अब क्या पहले जैसे मित्र मिलते है,आधुनिक युग में मोबाईल मित्र

 

पवन यादव पत्रकार,,यदि मित्रता की बात करें तो भगवान श्री कृष्ण और सुदामा का जरूर जिक्र आता है उनकी मित्रता जैसी मित्रता संसार में देखने को नहीं मिलती वैसे तो हमारे जीवन में कई ऐसे पड़ाव आते है जब किसी न किसी अजनबी व्यक्ति से मुलाकात होती है और विचार मिलने पर हम उसे मित्र बना लेते है जैसे की बचपन के मित्र फिर स्कूल कालेज की मित्रता ,इनमें कुछ ही मित्र ऐसे होते है जो आपके जीवनभर सुख दुख में साथ देते हुए खड़े होते है नहीं तो आजकल औपचारिकता रह गई है मिले तो हाय न मिले तो बाय वैसे तो दो सगे भाइयों के बीच और पिता पुत्र के बीच भी मित्रवत ब्यौहार होना चाहिए ,

कैसी थी श्री कृष्ण और सुदामा जी की मित्रता 

बात द्वापर की है जब भगवान श्रीकृष्ण को उनके मित्र सुदामा की दरिद्रता की बात पता चली तो उन्होंने प्रेरणा देकर सुदामा को द्वारका बुलाया नंगे पैर जब सुदामा द्वारका के लिए निकले तो भगवान ने भेष बदलकर पल पल सुदामा का साथ दिया इतना ही नहीं द्वारका पहुँचते ही भगवान सुदामा की आगवानी करने नँगे पैर दौड़े आये अपने सिंघासन में बैठाकर आंखों के अश्रु से पैर धुले पुराणों में आता है  सुदामा भगवान श्रीकृष्ण को अपना मित्र के साथ भगवान भी मानते थे ,सुदामा के लाये हुए तीन मुठ्ठी चावल को भगवान ने स्वीकार करते हुए खाया तो एक मुठ्ठी चावल में स्वर्ग और दूसरी मुठ्ठी चावल में पृथ्वी का बैभव दे दिया मतलब भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा की दरिद्रता हर ली ,ऐसे मित्रता भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की थी ऐसे मित्र न कभी संसार में हुए है न कभी होंगे ,

स्मार्ट फोन ने ले ली मित्र की जगह 

लेकिन आज के आधुनिक युग में नई पीढ़ी स्मार्ट फोन को ही अपना सबकुछ मान बैठी है ,आपको एक नहीँ हजारों युवा ऐसे मिल जायेंगे जो की मोबाईल फोन में इतने व्यस्त रहते है की उन्हें अपने माता पिता और परिवार के लिए ज्यादा फुर्सत ही नहीं ,पहले के समय की मित्रता में दो युवक एक दूसरे को अपना मित्र नहीं भाई समझते थे और एक दूसरे के माँ बाप बहन को अपना ,

शराबी होते जा रहे त्यौहार 

पहले हर त्यौहार बड़ी खुशियों के साथ मनाएं जाते थे लेकिन समय बदला और इस आधुनिक युग में त्यौहार भी शराबी हो गए है ,अब अधिकांश लोग तीज त्यौहारों में शराबखोरी कर न सिर्फ समाज में शांति भंग करने का कार्य करते है बल्कि त्यौहारों के रंग में भंग डालने का भी काम कर रहे है ,सूरज चांद वही है लेकिन इंसान की सोच बदलती जा रही है,

 

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