क्षमा ही एक ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने जीवन को सरल बना सकता है



कटनी/स्लीमनाबाद(सुग्रीव यादव):क्षमा वीररस्य भूषणम अर्थात क्षमा को वीरों का आभूषण कहा गया।सहनशीलता, सहिष्णुता, शांति और संतुलन का परिचय देना ही इस क्षमा धर्म का सार है।उत्तम क्षमा से प्रारंभ पर्युषण पर्व का समापन अंतिम दिन उत्तम क्षमा वाणी के साथ रविवार को पूर्ण हुआ।

इस दौरान रविवार को सकल जैन समाज के द्वारा पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर स्लीमनाबाद मैं सामूहिक क्षमावाणी का आयोजन किया गया।क्षमा वाणी के चलते पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में बहुत रौनक दिखाई दी। सुबह 9 बजे श्रीजी का मंत्रों के साथ पूजा अर्चना के बाद कलशाभिषेक हुआ जिसमें श्रद्धालु शामिल हुए। कलशाभिषेक के बाद जैन धर्मावलम्बियों ने एक दूसरे से क्षमा याचना की।क्षमा पर्व सामूहिक रूप से मनाया गया।इस दौरान वक्ता श्रेयांस जैन ने क्षमावाणी पर्व पर बोलते हुए कहा कि इंसान के जीवन में क्षमा ही ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने राग-द्वेष दूर कर सकता है और जीवन को सरल बना सकता है, तनाव रहित बना सकता है। अनादि काल से चली आ रही इस परम्परा को आने वाली पीढ़ी भी अंगीकार करें ताकि क्षमा का महत्व बढ़ता रहे।बुजुर्गों ने बच्चों के सामने झुककर उत्तम क्षमा कहकर जाने-अनजाने हुई गलतियों की क्षमा मांगी। वहीं, बच्चों ने भी बड़ों के पैर छूकर क्षमावाणी की।इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन किया गया।जिसमें बच्चों ने प्रस्तुतियां दी।
इस दौरान निर्मलचन्द्र जैन,प्रदीप जैन,सुधीर जैन,महेश जैन,संजय जैन,सतीशचंद्र जैन,डी के जैन,मयूर जैन,आकेश जैन, पप्पू जैन,विकास जैन, नीशु जैन सहित सकल जैन समाज की उपस्थिति रही।

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