आर्थिक गबन के प्रकरणों में वसूली कर,दर्ज करायें एफआईआर ,कलेक्टर

जबलपुर, जिले की सहकारी संस्थाओं और समितियों में गबन और धोखाधड़ी के प्रकरणों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने विभागीय जांच पूर्ण न होने, दोषियों से राशि की वसूली लंबित होने और आर्थिक गबन के बाद भी संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं कराने पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ की कार्यप्रणाली पर गहन नाराजगी व्यक्त किया है। कलेक्टर श्री शर्मा ने उपायुक्त सहकारिता शिवम मिश्रा को निर्देशित किया कि दोषी कर्मियों को किसी भी हाल में बख्शा न जाये, उनके विरूद्ध हर हाल में कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करायें।कलेक्टर श्री शर्मा ने तदाशय के निर्देश विगत दिनों संपन्न बैठक में दिए। बैठक में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा भी मौजूद रहे। बैठक में कलेक्टर ने लंबित विभागीय जांचों, प्राथमिक कृषि साख, सहकारी समितियों के समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, विक्रेता, खरीदी प्रभारी द्वारा धान व गेंहू उपार्जन में घटी करने, उर्वरक बिक्री, लिमिट से अधिक आहरण, फर्जी ऋण स्वीकृत कर राशि गबन करने के दोषियों के विरूद्ध एफआईआर और राशि वसूली की प्रगति और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की।
दोषियों से वसूली करें और एफआईआर करायें
समीक्षा के दौरान पता चला कि समितियों द्वारा अलग-अलग प्रकरणों को मिलाकर 4 करोड़ 59 लाख 22 हजार 976 रुपए की वित्तीय अनियमितता और गबन प्रकरणों में 38 कर्मी संलिप्त हैं। इन कर्मियों से राशि की वसूली और एफआईआर दर्ज कराने सहित सेवा से पृथक करने संबंधी कार्यवाही करने और प्रचलित विभागीय जांच में तेजी लाने के निर्देश कलेक्टर श्री शर्मा ने दिए।
बैठक में बताया गया कि पाटन की सरोंद समिति में उपार्जन साख सीमा से अधिक आहरण, धान व गेहूं की घटी राशि, प्रासंगिक व्यय व कमीशन से संस्था को 2 करोड़ 93 लाख 87 हजार 560 रुपये की हानि हुई है। इसके लिए समिति प्रबंधक प्रेम नारायण अहिवासी, विश्वनाथ गोंटिया, गेंदालाल पटेल एवं समिति कर्मचारियों मेहरबान सिंह, यज्ञ नारायण पटेल, संदीप गर्ग, भूपत पांडे, राजकुमार, ऑपरेटर सचिन दुबे, अमित यादव, मनोज पटेल और मनोज गोस्वामी दोषी पाये गये। कलेक्टर ने इन कर्मचारियों पर अभी तक ठोस कार्यवाही नहीं किये जाने पर सहकारी बैंक के सीईओ ज्ञानेन्द्र पांडेय के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देशित किया कि जारी विभागीय जांच शीघ्र पूरी करायें, सेवा नियमों के तहत कार्यवाही करें और राशि की वसूली सहित इन सभी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करायें।
कलेक्टर ने उपार्जन केन्द्र उडऩामेड़ी में वर्ष 2014-15 में धान उपार्जन में 875.59 क्विंटल घटी की राशि 11 लाख 90 हजार 800 रुपए के लिए दोषी समिति प्रबंधक विश्वनाथ गोंटिया, केन्द्र प्रभारी अनिरूद्ध गोंटिया, कम्प्यूटर ऑपरेटर संदीप दुबे एवं सहायक जुगल किशोर को दोषी पाने के बाद भी इनसे राशि वसूली नहीं करने और एफआईआर दर्ज नहीं कराने पर अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संबंधितों से तत्काल राशि की वसूली की जाए और एफआईआर भी दर्ज करायें।
इसी प्रकार शहपुरा शाखा की समिति घुंसौर के समिति प्रबंधक रामाधार नंदेसरिया, मुन्ना लाल साहू एवं खरीदी प्रभारी समिति महेन्द्र यादव को वर्ष 2012-13 से 2014-15 में धान व गेंहू उपार्जन में घटी के लिए दोषी मानते हुए 29 लाख 48 हजार 429 रुपये की वसूली की जानी थी। बावजूद इसके राशि की वसूली नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर श्री शर्मा ने एफआईआर दर्ज कराने और सेवा नियमों के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि कटंगी शाखा की समिति नगना में समिति प्रबंधक विजय तिवारी जो अब सेवानिवृत्त हो गये हैं उनसे खाद्यान्न बिक्री में अनियमितता, गेंहू व धान उपार्जन में सिलक की कमी हेतु 11 लाख 48 हजार 241 रुपये के दोषी पाये गये। वर्तमान में यह प्रकरण संयुक्त पंजीयक नायायलय में प्रचलित है। कलेक्टर ने कहा इस प्रकरण में शीघ्र विशेष अंकेक्षण कराया जाये।
बरेला शाखा की समिति पड़वार के समिति प्रबंधक अनन्त बडग़ैंया वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में धान व गेंहू उपार्जन में घटी के लिए दोषी पाये गये थे और उनसे एक लाख 97 हजार 578 रुपये की वसूली भी की गई। बावजूद इसके इस मामले में सीईओ जिला सहकारी बैंक द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कराने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अनन्त बडग़ैंया के विरूद्ध प्रचलित वित्तीय जांच कार्यवाही शीघ्र पूरी कराने के निर्देश दिए।
शाखा पाटन की समिति सकरा के समिति प्रबंधक रामरूद्र शर्मा वर्ष 2015 में गेंहू घटी एवं कैश क्रेडिट उपभोक्ता राशि सिलक शार्ट करने के मामले में 6 लाख 50 हजार 325 रुपए के दोषी पाये गये। बताया गया कि एक अगस्त 2019 को एफआईआर हेतु पाटन थाना में आवेदन दिया गया। लेकिन दस्तावेजों के अभाव में इनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। इस पर कलेक्टर ने तत्काल एफआईआर कराने, राशि की वसूली करने सहित सेवा नियमों के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित के विरूद्ध प्रचलित डीई को शीघ्र पूरा कराने की हिदायत भी दी।
मझगवा समिति के कर्मचारी रामसुजान पटेल, अर्जुन पटेल वर्ष 2012-13 में राशि 9 लाख 92 हजार 906 रुपए की घटी के लिए दोषी पाये गये। एफआईआर हेतु मझगवा थाने में 22 एवं 23 जुलाई 2019 को आवेदन दिया गया। लेकिन एफआईआर अभी तक दर्ज नहीं हो पाई है। इस पर श्री शर्मा ने तत्काल एफआईआर कराने और राशि की वसूली करने सेवा नियमों के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
शाखा चरगवां की समिति बजौरी में वर्ष 2011 में ऋण वितरण में अनियमितता की जाकर कूटरचित तरीके से फर्जी बही एवं क्रेडिट कार्ड तैयार कर फर्जी ऋण डाला जाकर 10 लाख 78 हजार रुपए का गबन किया गया जिसके लिए अजय तिवारी प्रभारी शाखा प्रबंधक एवं राम सिंह मार्को समिति प्रबंधक दोषी पाये गये। सीईओ द्वारा अवगत कराया गया कि जांच अधिकृत अधिकारी द्वारा न किये जाने से शून्य कर दी गई है। इस पर कलेक्टर ने शीघ्र जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिये।
शाखा गोहलपुर समिति तेवर में फर्जी ऋण 44.23 लाख रुपए के दोषी शाखा प्रबंधक सुरेश पचौरी, समिति प्रबंधक हरिशंकर दुबे के विरूद्ध 18 अप्रैल 2015 को एफआईआर दर्ज है। प्रकरण न्यायालय में प्रचलित है। कलेक्टर इस प्रकरण में प्रकरणों में विधिक परामर्श प्राप्त कर सक्षम पैरवी कराने की हिदायत दी।
शाखा पाटन समिति सकरा में वर्ष 2014-15 की घटी की राशि 76.34 लाख रुपए में प्रेमनारायण अहिवासी पर्यवेक्षक, देवेन्द्र यादव सहायक, ललित यादव आपरेटर दोषी पाये गये। इनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने हेतु पाटन थाना में 29 जुलाई 2019 को आवेदन दिया गया है। विभागीय जांच बोर्ड को जांच हेतु 23 मई 2020 को सौंपा गया है। कलेक्टर श्री शर्मा ने इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज करवाने, शीघ्र विभागीय जांच पूर्ण करने एवं राशि वसूली हेतु धारा 64-68 में प्रकरण प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया।
बैठक में बताया गया कि चरगंवा शाखा के सूखा राहत राशि के गबन प्रकरण में दोषी कर्मचारी आनंद प्रजापति की सेवा समाप्त कर दी गई है। अन्य दोषी संजय राजपूत की वेतन वृद्धि रोकी गई है वहीं समिति प्रबंधक विजय शुक्ला के विरूद्ध विभागीय जांच पूर्ण होने और मय ब्याज के 15 लाख 76 हजार 850 रुपए की वसूली राशि जमा होने की जानकारी दी गई। इस प्रकरण में एफआईआर भी 31 जुलाई 2019 को कराई जा चुकी है।

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