किसान अभी भी परेसान,नहीं मिल रहा धान का उचित दाम

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जबलपुर:सरकारें कहतीं है कीं हम किसानों के साथ है, हम किसानों के हमदर्द है, लेकिन यहाँ पर किसान अभी भी परेसान है, एक तरफ देखा जाए तो भले ही धान के बंपर उत्पादन के चलते सिहोरा कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन 700 से 1000 बोरा धान की आवक हो रही है,लेकिन धान उपार्जन में फ़िलहाल हो रहे विलंब के चलते कोरोना काल मे लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे किसान अपनी उपज का वाजिब दाम प्राप्त करने अपने खून पसीने की कमाई लेकर मंडी पहुँच रहे किसानों को निराशा ही हाथ लग रही है, किसानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडी में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद धान का दाम 14 से 15 सो रुपए क्विंटल तक ही प्राप्त हो पा रहा है।


धान का रकबा 13हजार हेक्टेयर


उल्लेखनीय है कि सिहोरा तहसील में 11000 से अधिक किसानों ने धान उपार्जन हेतु 13098 .38 हेक्टेयर रखने का पंजीयन कराया है जबकि जानकारों का मानना है कि इससे अधिक रखने में धान की बोनी हुई थी किंतु धान उपार्जन की अभी तक कोई नियत जानकारी ना होने के कारण किसान अपनी उपज खेत खलियान से अथवा मंडी लाकर उपज बेचने विवश है
नहीं मिल रहा वाजिब दाम
किसानों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का दाम लगभग 19 सो ₹ है जबकि व्यापारी एवं बिचौलिए किसानों की विवशता का लाभ उठाकर खेत खलियान एवं मंडी से 14 सौ से पंद्रह सौ ₹ क्विंटल के भाव में धान क्रय कर रहे हैं।


किसानों की विवशता


अन्नदाता किसान आर्थिक परेशानियों के चलते अपनी उपज औने पौने दाम पर बेचने विभाग से जुनवानी निवासी कृषक चंद्रजीत पटेल ने बताया कि हार्वेस्टर वालों को कटाई का हाई की राशि के अलावा अगली फसल गेहूं अथवा दलहन की तैयारी हेतु खेत की जुताई खाद बीज की व्यवस्था हेतु किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचना पड़ रही है इसके अलावा हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्व दीपावली पर परिवारिक आवश्यकता हेतु अपनी जिम्मेदारी के निर्वहन में भी किसानों को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है।


भारतीय किसान यूनियन ने की मांग


भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष एडवोकेट रमेश पटेल ने बताया कि धान धान उपार्जन की अधिकारिक तिथि 15 नवंबर बताई जा रही है जबकि प्रशासन की तैयारी को देखते हुए लगता है कि धान उपार्जन 30 नवंबर से पहले प्रारंभ नहीं हो सकेगा क्योंकि ना तो अभी तक उपार्जन केंद्र निर्धारित किए गए हैं और ना ही उपार्जन केंद्रों की कोई व्यवस्था तय करने कोई कदम उठाए गए हैं ऐसे में किसानों को अपनी आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति हेतु खुले बाजार में उपज बेचने मजबूर होना पड़ेगा भारतीय किसान यूनियन ने मांग की है कि उपार्जन की नियत तिथि से खरीदी प्रारंभ करने प्रशासन उचित कदम उठाएं।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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