इन तीन दिनों के प्रातः स्नान से मिलेगा पूरे माघ मास का पुण्य

पूरे माघ मास का फल : त्रयोदशी से माघी पूर्णिमा तक अंतिम 3 दिन प्रातः स्नान करने से भी महीने भर के स्नान का प्रभाव, पुण्य प्राप्त होता है |

[त्रयोदशी (14 फरवरी) , चतुर्दशी (15 फरवरी), पूर्णिमा (16 फरवरी) ]

पूरा मास जल्दी स्नान कर सकें तो ठीक है नहीं तो एक सप्ताह तो अवश्य करें। त्रयोदशी से माघी पूर्णिमा तक अंतिम 3 दिन प्रातः स्नान करने से भी महीने भर के स्नान का प्रभाव, पुण्य प्राप्त होता है।

जो वृद्ध या बीमार हैं, जिन्हें सर्दी जुकाम आदि हैं वे सूर्यनाड़ी अर्थात् दायें नथुने से श्वास चलाकर स्नान करें तो सर्दी जुकाम से रक्षा हो जायेगी।

माघ स्नान से स्वर्ग की प्राप्ति :

पद्म पुराण में कथा आती है कि सुब्रत नामक एक ब्राह्मण था। उसने नियम-अनियम की परवाह किये बिना जीवनभर धन कमाया। बुढ़ापा आया, अब देखा कि परलोक में यह धन साथ नहीं देगा। और तभी दैवयोग से एक रात उसका धन चोर चुरा ले गये। तो धन चोरी के दुःख से दुःखी हुआ और बुढ़ापे में अब मैं क्या करूँ ?…. ऐसा शोक कर रहा था, इतने में उसे आधा श्लोक याद आ गया कि ‘माघ मास में ठंडे पानी से स्नान करने से व्यक्ति की सद्गति होती है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।’ तो उसने माघ स्नान शुरु किया। 9 दिन स्नान किया, 10वें दिन ठिठुरन से शरीर कृश हो गया और मर गया। उसने दूसरा कोई पुण्य नहीं किया था लेकिन माघ स्नान के पुण्य प्रभाव से वह स्वर्ग को गया।

भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप ने वसिष्ठ जी के चरणों में प्रार्थना कीः “प्रभु ! उत्तम व्रत, उत्तम जीवन और उत्तम सुख, भगवत्सुख का मार्ग बताने की कृपा करें।”

वसिष्ठ जी बोलेः “राजन् ! माघ मास में सूर्योदय से पहले जो स्नान करते हैं वे अपने पापों, रोगों और संतापों को मिटाने वाली पुण्याई प्राप्त कर लेते हैं। यज्ञ-याग, दान करके लोग जिस स्वर्ग का पाते हैं, वह माघ मास का स्नान करने वाले को ऐसे ही प्राप्त हो जाता है।”

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