बसंत पंचमी आज ,जानें पूजा मुहूर्त और विधि सहित पौराणिक महत्व 

 

16 फरवरी, 2021 (मंगलवार)

पूजा मुहूर्त : 06:59:11 से 12:35:28 तक

अवधि :5 घंटे 36 मिनट

**बसंत पंचमी पौराणिक महत्व**
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, आज ही के दिन देवी रति और भगवान कामदेव की षोडशोपचार पूजा करना बेहद ही शुभ और फलदाई होता है। कहा जाता है कि, बसंत पंचमी के दिन जो कोई भी दंपत्ति भगवान कामदेव और देवी रति की पूजा षोडशोपचार विधि से करते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है और उनका रिश्ता मजबूत होता है।

**हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष के माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।** इस दिन ही ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती की रचना की थी। इस बात का उल्लेख पुराणों में मिलता है कि, सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनि की रचना की क्योंकि, अपनी प्रारंभिक अवस्था में मनुष्य मूक था और धरती बिल्कुल शांत थी तब, ब्रह्मा जी ने धरती को इस अवस्था में देखा तो अपने कमंडल से जल लेकर छिड़क दिया। जिससे एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके हाथ में वीणा थी और उनका दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। यही शक्ति मां सरस्वती कहलायीं। उन्होंने वीरा का तार छेड़ा तो तीनो लोक में कंपन हो गया और सबको शब्द वाणी मिल गई।

**सरस्वती पूजा**
बसंत पंचमी के दिन देशभर में लोग सरस्वती मां की पूजा करते हैं। विशेष तौर से वो लोग जो साहित्य, शिक्षा, कला, इत्यादि के जुड़े क्षेत्र से जुड़े होते हैं। मान्यता है कि, यदि इस दिन देवी सरस्वती की पूजा के साथ-साथ अगर सरस्वती स्त्रोत भी पढ़ा जाए तो इससे जातक को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं।

**जानिए सरस्वती पूजा 2021 का मुहूर्त:**
सरस्वती पूजा 2021 की तिथि: 16 फरवरी, 2021 (मंगलवार)
पूजा मुहूर्त: 06:59:11 से 12:35:28 तक
अवधि: 5 घंटे 36 मिनट

**श्री पंचमी**
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के साथ-साथ मां लक्ष्मी जी, जिन्हें धन की देवी भी कहा गया है उनकी और भगवान विष्णु की पूजा का भी विधान बताया गया है। बहुत से लोग सरस्वती पूजा के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं। मुख्य रूप से कारोबारी या व्यवसाई वर्ग के लोग इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ताकि देवी लक्ष्मी का वरदान उनके जीवन में बना रहे। इस दिन की पूजा में लक्ष्मी जी की पूजा के साथ-साथ श्री सूक्त का पाठ का नाम बेहद ही शुभ फलदाई साबित हो सकता है।

**जानकारी के लिए बता दें कि यहां बताई जा रही है सभी पूजा पंचोपचार व षोडशोपचार विधि से ही करनी चाहिए।**

**षोडशोपचार पूजा संकल्प**
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे,

अमुकनामसंवत्सरे माघशुक्लपञ्चम्याम् अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाहं सकलपाप – क्षयपूर्वक – श्रुति –

स्मृत्युक्ताखिल – पुण्यफलोपलब्धये सौभाग्य – सुस्वास्थ्यलाभाय अविहित – काम – रति – प्रवृत्तिरोधाय मम

पत्यौ/पत्न्यां आजीवन – नवनवानुरागाय रति – कामदम्पती षोडशोपचारैः पूजयिष्ये।

**रति और कामदेव का ध्यान**
ॐ वारणे मदनं बाण – पाशांकुशशरासनान्।

धारयन्तं जपारक्तं ध्यायेद्रक्त – विभूषणम्।।

सव्येन पतिमाश्लिष्य वामेनोत्पल – धारिणीम्।

पाणिना रमणांकस्थां रतिं सम्यग् विचिन्तयेत्।।

बसंत पंचमी का त्यौहार
बसंत पंचमी का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक के साथ-साथ विद्या की देवी सरस्वती मां के जन्मदिन के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। बसंत पंचमी का ये त्यौहार भारत के साथ-साथ बांग्लादेश और नेपाल में भी बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि दुनिया के जिस भी कोने में भारतीय लोग रहते हैं वह इस दिन मां सरस्वती की पूजा इत्यादि करके इस पर्व को पूरे विधि-विधान से मनाते हैं। इसके अलावा यह मां शारदा की उपासना और उनकी असीम अनुकंपा अपने जीवन में हासिल करने के लिए भी बेहद ही महत्वपूर्ण दिन बताया गया है।

बसंत पंचमी के पर्व के महत्व का वर्णन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में विस्तार पूर्वक किया गया है। देवी भागवत में बसंत पंचमी का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द, शक्ति, विद्या की देवी माँ सरस्वती का जन्म हुआ था। वसंत पंचमी के दिन लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।

**बसंत पंचमी पूजन विधि**
इस दिन देशभर में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग मां शारदा की पूजा करके उनसे और अधिक ज्ञानवान बनने की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन स्कूलों और कॉलेजों में भी देवी सरस्वती की आराधना और पूजा की जाती है। भारत के पूर्वी प्रांत में इस दिन देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जाती है और उनकी पूजा अर्चना की जाती है और फिर अगले दिन उस मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। बसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनने, हल्दी से मां सरस्वती की पूजा करने और हल्दी का ही तिलक लगाने का विशेष महत्व बताया गया है। कहा गया है कि, ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा शीघ्र ही प्राप्त होती है।

**बसंत पंचमी पर पीले रंग का क्या है महत्व?**
वसंत पंचमी के दिन बहुत से लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि, आखिर पीले रंग और बसंत पंचमी का क्या संबंध है? इस संदर्भ में बताया जाता है कि, क्योंकि पीला रंग इस बात का प्रतीक होता है की फसलें पकने वाली हैं, साथ ही पीला रंग समृद्धि का सूचक भी माना गया है। बसंत पंचमी के पर्व के साथ वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान फूलों पर बाहर आ जाती है खेतों में सरसों की फसलें लहलहाने लगती है और गेहूं की बालियां खिल उठती है। खेतों में रंग बिरंगी तितलियां उड़ने लगते हैं और यह नजारा वाकई देखने लायक होता है। इस पर्व को बहुत जगहों पर ऋषि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

**वसंत पंचमी पर्व का विभिन्न रूप**

बसंत पंचमी के दिन श्रद्धालु गंगा नदी या किसी भी अन्य पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं और इसके बाद मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं।
उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में बसंत पंचमी के दिन अलग ही भीड़ उमड़ती है। इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा और संगम के तट पर जुटते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से श्रद्धालु इस दिन हिमाचल प्रदेश के तातापानी (गर्म पानी) में एकत्रित होते हैं और वहां सल्फर के गर्म चरणों में स्नान करते हैं।
इसके अलावा इस दिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में पीले रंग के पकवान बनाए जाने का भी विधान है। इसके अलावा लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।
पंजाब में ग्रामीणों को सरसों के पीले खेतों में झूमते हुए और पीले रंग की पतंगों उड़ाते हुए देखा जाता है।
पश्चिम बंगाल में ढाक की थापों के बीच सरस्वती माता की पूजा की जाती है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गुरु का लाहौर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
बसंत पंचमी के दिन नया काम शुरू करना होता है बेहद ही शुभ
माना जाता है कि, बसंत पंचमी के दिन कोई भी नया काम शुरू किया जाए तो सफलता निश्चित होती है। जिन लोगों को उनके गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा होता है वह बसंत पंचमी के दिन गृह प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति नया व्यवसाय शुरू करने का विचार कर रहा हो तो उसके लिए भी बसंत पंचमी का दिन बेहद ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यानी कि कुल मिलाकर अगर आपको कोई भी नया या शुभ काम करना हो जिसका आपको उपयुक्त मुहूर्त ना मिल रहा हो तो वह काम बसंत पंचमी के दिन शुरु या संपन्न किया जा सकता है।

**बसंत पंचमी पर क्या करें **

इस दिन पवित्र नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए और मां सरस्वती की पूजा करने के बाद ही कुछ ग्रहण करना चाहिए।
बसंत पंचमी की पूजा में मां सरस्वती को हल्दी अवश्य अर्पित करें और उस हल्दी से अपनी पुस्तक पर को अपनी पुस्तकों पर ‘एं’ भी लिखें।
बसंत पंचमी के दिन पुखराज और मोती धारण करना बेहद ही शुभ माना गया है।
इस दिन मां सरस्वती को खीर का भोग अवश्य लगाएं और पूजा के बाद उस खीर को सपरिवार प्रसाद के रूप में ग्रहण अवश्य करें।
इसके अलावा यदि आप मां सरस्वती को इस दिन कलम अर्पित करते हैं और उसी कलम से वर्षभर खुद काम करते हैं तो आपको जीवन में तरक्की अवश्य प्राप्त होती है।

**बसंत पंचमी पर क्या ना करें**
बसंत पंचमी के दिन पूर्व से ही काले रंग के कपड़े धारण न करें क्योंकि इस दिन सफेद और पीले रंग के वस्त्र ही पहनना शुभ बताया गया है।
इस दिन घर में कलेश ना करें।
इस दिन फसल ना काटे और ना ही पेड़ों को काटे।
बसंत पंचमी के दिन भूल से भी तामसिक भोजन या मदिरा का सेवन बिल्कुल भी ना करें।

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