24 घँटे तक शव को पीएम के लिए करना पड़ा डॉक्टरों का इंतजार

(गुड्डू पटवा) कुंडम ,जबलपुर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कुंडम की स्वास्थ सुविधाओं की हालत लगंडे घोड़े की तरह है जिसका ताजा उदाहरण देखने को मिला जब एक शव को पीएम के लिए 24 घँटे तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा हासिल जानकारी के मुताबिक 26 मार्च को देवरा ग्राम के रतिराम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी कुंडम स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी बनी मुसीबत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडम की व्यवस्था चरमराई एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडम अधिक कार्य के कारण डॉक्टर हो गया बीमार हॉस्पिटल में भर्ती समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडम के अंतर्गत आने वाले 199 गांव जहां पर 6 डॉक्टरों की पोस्टिंग है लेकिन केवल एक डॉक्टर के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र चलाया जा रहा है जिसके चलते क्षेत्र के ग्रामीण जन परेशान हैं मरीजों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा है आचार संहिता की आड़ को लेकर अधिकारी नहीं भेज पा रहे हैं डॉक्टरों को अधिकारियों की हीला हवाली का खनिजा गरीब जनता आदिवासी को भुगतना पड़ रहा है कुंडम आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहां पर एक डॉक्टर सोनू शर्मा लगातार 24 घंटे ड्यूटी करने के कारण बीमार हो गए हैं और निजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं जिसके कारण व्यवस्था चरमरा गई है और मरीज दर-दर भटक रहे हैं कुंडम समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों की कमी मरीजों पर इस तरह प्रभाव डाल रही है कि देवरा निवासी रतीराम जिसकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी उसके पोस्टमार्टम के लिए 24 घंटे परिजनों को भटकना आखिरकार कुंडम में पोस्टमार्टम नहीं हो सका जिससे लेकर जबलपुर जाना पड़ा वहां भी परिजन परेशान होते रहे डाक्टरों द्वारा कहा जाता है की कलेक्टर से परमिशन लेकर आओ क्षेत्र की आदिवासी जनता ने कलेक्टर से मांग की है कि जल्द से जल्द डॉक्टरों की व्यवस्था कराई जाए ताकि गरीब आदिवासी परेशान ना हो एवं एक डॉक्टर के ऊपर ही सारा आभार ना आए

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