सूर्य उपासना से मिट जाते है बड़े -बड़े संकट ऐसे लोगों को जरूर करनी चाहिए सूर्य उपासना

ये लोग जरूर दें सूर्य देव को अर्ध्य जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो। जिनमें आत्मविश्वास की कमी रहती हो। जो भीड़ या ज्यादा लोगों के सामने घबरा जाते हों। जो निराशावादी हों, जिन पर नकारात्मकता हावी रहती हो। जिन्हें हमेशा कोई अज्ञात भय सताता रहता हो। जिन लोगों को घर-परिवार और समाज में मान की तलाश हो।

सूर्यदेव को जल किस तरह अर्पित किया जाए

सूर्यदेव को जल तांबे के पात्र से अर्पित करना चाहिए। जल चढ़ाते समय पात्र को दोनों हाथों में ग्रहण करना चाहिए। पात्र में जल के साथ लाल वर्ण का पुष्प, कुमकुम और अक्षत भी डालने चाहिए। जल चढ़ाते समय जल की गिरती धार में सूर्य की किरणों को देखना चाहिए। पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही जल चढ़ाना चाहिए। जल अर्पित करते हुए ध्यान रहे कि जल आपके पैरों में आए। जल चढ़ाते हुए ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

घर में आती है सुख-शांति

मान्यता है कि यदि आप पर सूर्यदेव की कृपा है तो जीवन और कामकाज में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही साथ धन प्राप्ति के योग भी बनते हैं। ग्रह दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए भी यह सकारात्मक उपाय है। सूर्य की कृपा से घर में भी सुख-शांति का वातावरण रहता है। सूर्यदेव को जल अर्पित करने से व्यक्ति का चित्त भी स्थिर होता है और उसका उसके काम पर सकारात्मक असर होता है।

सूर्य पूजन का वैज्ञानिक पक्ष

इसका वैज्ञानिक पक्ष यह है कि सूर्य की किरणों से मिलने वाली ऊर्जा से अंग सुचारू रूप से काम करते हैं। सुबह सूर्य दर्शन से शरीर में विटामिन-डी की कमी भी नहीं रहती है। आज भी हमारे धर्मग्रंथों में और वैज्ञानिक मतों में भी माना जाता है कि सूर्य के प्रकाश से रोग और शोक नष्ट होते हैं। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि हर व्यक्ति उनके साक्षात दर्शन कर सकता है।

ऐसे लोग जरूर अर्पित करें जल

जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो। जिनमें आत्मविश्वास की कमी रहती हो। जो भीड़ या ज्यादा लोगों के सामने घबरा जाते हों। जो निराशावादी हों, जिन पर नकारात्मकता हावी रहती हो। जिन्हें हमेशा कोई अज्ञात भय सताता रहता हो। जिन लोगों को घर-परिवार और समाज में मान की तलाश हो।

सूर्यदेव को जल किस तरह अर्पित किया जाए

सूर्यदेव को जल तांबे के पात्र से अर्पित करना चाहिए। जल चढ़ाते समय पात्र को दोनों हाथों में ग्रहण करना चाहिए। पात्र में जल के साथ लाल वर्ण का पुष्प, कुमकुम और अक्षत भी डालने चाहिए। जल चढ़ाते समय जल की गिरती धार में सूर्य की किरणों को देखना चाहिए। पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही जल चढ़ाना चाहिए। जल अर्पित करते हुए ध्यान रहे कि जल आपके पैरों में आए। जल चढ़ाते हुए ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

घर में आती है सुख-शांति

मान्यता है कि यदि आप पर सूर्यदेव की कृपा है तो जीवन और कामकाज में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही साथ धन प्राप्ति के योग भी बनते हैं। ग्रह दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए भी यह सकारात्मक उपाय है। सूर्य की कृपा से घर में भी सुख-शांति का वातावरण रहता है। सूर्यदेव को जल अर्पित करने से व्यक्ति का चित्त भी स्थिर होता है और उसका उसके काम पर सकारात्मक असर होता है।

सूर्य पूजन का वैज्ञानिक पक्ष

इसका वैज्ञानिक पक्ष यह है कि सूर्य की किरणों से मिलने वाली ऊर्जा से अंग सुचारू रूप से काम करते हैं। सुबह सूर्य दर्शन से शरीर में विटामिन-डी की कमी भी नहीं रहती है। आज भी हमारे धर्मग्रंथों में और वैज्ञानिक मतों में भी माना जाता है कि सूर्य के प्रकाश से रोग और शोक नष्ट होते हैं। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि हर व्यक्ति उनके साक्षात दर्शन कर सकता है।

इन मंत्रों से करें सूर्य उपासना

. ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

5. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।

जानिए 12 सूर्य नमस्कार मंत्र

समस्त यौगिक क्रियाओं की भांति सूर्य नमस्कार को सर्वांग व्‍यायाम कहा जाता है। सूर्य नमस्कार सदैव खुली हवादार जगह पर कंबल का आसन बिछा कर खाली पेट अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार करने से मन शांत और प्रसन्न होता है…

* ॐ सूर्याय नम: ।
* ॐ भास्कराय नम:।
* ऊं रवये नम: ।
* ऊं मित्राय नम: ।
* ॐ भानवे नम:
* ॐ खगय नम: ।
* ॐ पुष्णे नम: ।
* ॐ मारिचाये नम: ।
* ॐ आदित्याय नम: ।
* ॐ सावित्रे नम: ।
* ॐ आर्काय नम: ।

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