सिहोरा प्रशासन की देखरेख में साइलो बैग में लुटता रहा किसान  ऐसे खुला राज 

जबलपुर :गेंहू खरीदी को सुलभ और बेहतर तरीके से बनाने के लिए प्रशासन द्वारा हरगढ़ में साइलो बैग नामक केंद्र खोला गया था जो की स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में था साइलो केंद्र में जल्दी होने वाली तौल और यहाँ पर लांच घूस न लगने से किसान बहुत खुश थे लेकिन उन्हें क्या पता था की यहाँ पर उनकी जेब नहीं काटी जा रही बल्कि सीधे दिनदहाड़े डाका डाला जा रहा है तकरीबन 1 लाख से ज्यादा खरीदी कर चुके साइलो बैग की बेईमानी का पता जब चला जब गुरुवार को कुछ किसानों ने पहले तो निजी कांटे में तौल करवाकर साइलो पहुँचे लेकिन वहाँ पर जब उसी ट्राली की तौल हुई तो किसानों के पैरों के तले से जमीन खिसक गई बताया जा रहा है की सीधे -सीधे यहाँ तीन किवंटल अनाज की तौल ज्यादा की जा रही मतलब यदि एक ट्राली में 50 किवंटल अनाज है तो उसमें किसान के खाते में सिर्फ 47 किवंटल अनाज ही आता था बाकी तीन किवंटल की लूट किसान की आंखों के सामने ही साइलो बैग द्वारा की जा रही थी

किसानों का गुस्सा चरम पर
वहीं गुरुवार 16 मई के दिन जैसे ही किसानों को पता चला की उनकी आंखों में धूल झोंकी जा रही है सभी किसानों ने हंगामा सुरु कर दिया जिसे देखते ही तहसिलदार मेघा पवार और नायब तहसीलदार अरुण भूषण दुबे साइलो केंद्र पहुँचे लेकिन किसानों का आक्रोश चरम पर था दोनों अधिकारियों ने किसानों को समझाईस दी लेकिन बात नहीँ बनी

जिनको पता चल गया उनको लौटाने का लॉलीपॉप
वहीँ हरगढ़ पहुँची तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने उग्र किसानों को शांत करने जिनकी आज तौल में गड़बड़ी हुई उनको उतना ही अनाज लौटाने का लॉलीपॉप थमा दिया लेकिन इससे पहले जो किसान लूट चुके है उनका अनाज कौन लौटाएगा सवाल गम्भीर है समस्या भी गम्भीर है लेकिन प्रसासन का ये लॉलीपॉप अन्य किसानों के लिए नाइंसाफी तो नहीँ ?इसका जबाब तो किसान ही देंगे बरहाल जिस कांटे की तौल से 1 लाख से ज्यादा किवंटल अनाज साइलो बैग ने तौल दिया उसी कांटे में गड़बड़ी कहीँ न उन किसानों के लिए घाटा का सौदा है जो की पूर्व में अपनी उपज की तौल यहाँ करवा चुके है

हलाकि इस पूरे मामले की जानकारी के लिए जब हमारे द्वारा तहसीलदार मेघा पवार व नायब तहसीलदार अरुण भूषण दुबे को फोन लगाकर हकीकत जाननी चाही साथ ही लुट चुके किसानों को ये कैसे न्याय दिलाएंगे ये सब जानकारी के लिए जब हमने फोन लगाया तो इनके पास फोन रिसीव करने का समय नहीँ था क्या ऐसे अधिकारी किसानों को न्याय दिलवा पाएंगे ?

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