सदाबहार अविरल धारा से बहने वाली हिरन नदी का अस्तित्व अब संकट में

(पवन यादव )जबलपुर :जिले के कुंडम से निकलकर हजारों ग्रामीणों सहित जीव ,जंतुओं ,पशुओं की प्यास बुझाने वाली हिरन नदी इस गर्मी में एक बार सूख चुकी है आपको बता दें की विगत 5 वर्षों से सदाबहार जीवनदायनी हिरन नदी गर्मी आते ही सूख जाती है अब ऐसे में जब प्रचंड गर्मी ऊपर से नदी का सूख जाना कहीँ न कहीँ जमीन के जलस्तर को पाताललोक में ले जा रहा है जो की बहुत बड़ी चिंता का विषय है वहीँ देखा जाए तो भविष्य में भी यदि ऐसे ही हालात रहे तो पानी के लिए हाहाकार मच जायेगा जिसपर प्रशासन को गम्भीरता पूर्वक जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेने होंगे क्योंकि कुंडम ,सिहोरा, पाटन सहित अन्य तहसील और ग्रामीणों को जल रूपी जीवन प्रदान करने वाली हिरन का अब अस्तित्व संकट में है वैसे तो बहुत सी समाजसेवी संस्थाये है जो की नदियों के सरंक्षण की बातें तो खूब करती है लेकिन इन संस्थाओं द्वारा हिरन नदी के सरंक्षण को लेकर आज तक कोई ठोस कदम नहीँ उठाये गए तो वहीँ प्रशासन भी कहीँ न कहीँ नदी की दुर्दशा का जिम्मेवार है क्योंकि जिस तरह से रेत माफ़ियों ने नदियों से रेत का अवैध उत्खनन कर उसके स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की है इसपर प्रशासन पूरी तरह नकेल कसने में नाकाम साबित हुआ तो वहीँ अपने आपको नेता मानकर एक पौधे के साथ सेल्फी लेकर पेड़ पौधे लगाने के नाम पर पब्लिकसीटी करके सन्तुष्ट होने वाले जनप्रतिनिधियों ने कभी नदी के किनारे जाकर पेड़ पौधे लगाए ?ये तो वे ही जानें लेकिन आज नदियों के किनारे लगे प्राचीन पेड़ पौधे भी नहीँ रह गए है साथ ही नदी की आत्मा मानी जाने वाली रेत को रेत माफ़ियों ने उत्खनन कर लिया इसके साथ ही देखा जाए तो सभी जगहों पर अधिक मात्रा में बोरिंग होने की भी बजह भी बताई जा रही है जो की हिरन के अस्तित्व को खत्म करने में कहीँ न कहीँ जिम्मेदार है

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