विस्थापित वोटरों का ऐलान नहीं करेंगे मतदान

जबलपुर:मदन महल पहाड़ी क्षेत्र से विस्थापित होचुके और विस्थापन की कगार पर बैठे लगभग 2000 से ज्यादा परिवार के 15 हजार से अधिक वोटरों का संयुक्त रूपसे ऐलान कि आगामी चुनावों में वो नहीं करेंगे मतदान यह निर्णय उन्होंने विस्थापन की कार्यवाही के चलते किसी भीराजनैतिक दल, नेता और सामाजिक संस्था द्वारा मदद करने तथा विस्थापन के बाद राज्य सरकार तथा जिलाप्रशासन द्वारा उचित पुनर्वास की व्यवस्था करने के चलतेलिया है।

इस संबंध में विस्थापन की मार झेल चुकी श्रीमतीरानी द्विवेदी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने वाले अमले कोकिसी दुखदर्द, मुसीबत और नुकसान से कोई सरोकार नहींहै। उनका कहना है कि पति मुकेश द्विवेदी के पैर काऑपरेशन होना था और सब लोग हॉस्पिटल में थे। बावजूदइसके जिला प्रशासन और निगम कर्मियों ने उनके मकान कोतोड़ दिया उनकी पूरी गृहस्थी का सामान खराब हो गया है।इसी तरह विस्थापित होने के सदमे से डब्बल साहू तथा 45 वर्षीय मनीष सेन का भी निधन हो गया है। ज्ञात हो कि डब्बल साइकिल सुधारकर अपने 8 सदस्यों के परिवार पोषण करते थे तथा मनीष सेन 5 सदस्यों का जिनमें उनकी बूढ़ी मां, पत्नी तथा दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और शायद वो इतना भी नहीं समझते अब उनके पापा इस दुनिया में नहीं हैं।

क्षेत्रीय निवासी अरूण कुमार ने बताया कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए क्षेत्रीय विधायक तरूण भनोत विस्थापन की कार्यवाही के चलते मदन महल पहाड़ीवासियों से सहानुभूति जताने बार-बार आ जाते थे।साथ ही उन्होंने यह आश्वासन भी दिया था कि अगर मैं जीतता हूं तो इस बात की गारंटी नहीं कि आप लोगों के घर बचे या न बचे लेकिन मेरी सरकार बनती है तो आप लोगों के घर नहीं टूटने दूंगा। इस आश्वासन के चलते पहाड़ीवासियों ने क्षेत्रीय विधायक के पक्ष में विधानसभा चुनाव में खूब वोटिंग की और वह जीतकर मंत्री भी बन गए तथा प्रदेश में उनकी सरकार भी आ गई। इसके बाद 28 जनवरी से जब दोबारा घर तोड़ने की कार्यवाही शुरू की गई तब विधायक को पहाड़ीवासियों ने फोन लगाया लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा और न ही कभी पहाड़ीवासियों सुध लेने तिलहारी पहुंचे। एक बार बीच में जरूर गौरव भनोत तिलहरी पहुंचे तो क्षेत्रीय जनता ने उनसे शिकायत की कि इस भरोसे पर आपके भाई को जिताए कि शायद वो घर टूटने से बचा लेंगे लेकिन वो तो जीतने के बाद यहां हम लोगों का हालचाल जानने तक नहीं आए। इस पर गौरव भनोत का कहना था कि मेरा भाई अपनी दम पर चुनाव जीता है न कि आप लोगों के वोटों ने उसे जिताया। विस्थापितों का कहना है कि यदि मंत्री तरूण भनोत न्यायालय से यह कहकर समय मांगते कि मेरी सरकार को बने अभी एक महीना ही हुआ है। पिछले 15 सालों से भाजपा की सरकार थी इसलिए मुझे क्षेत्र की जनता के उचित पुनर्वास की व्यवस्था करने का समय दिया जाए इसके बाद उन्हें विस्थापित किया जाए तो शायद इस पर न्यायालय कुछ दिनों का समय दे भी देता। जिस तरह अभी राज्य शासन की अर्जी पर न्यायालय ने वोटिंग तक मदन महल पहाड़ी क्षेत्र के घर न तोड़ने का आदेश दिया।इधर सुशील पाण्डे का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा जो गरीब जहां रह रहा है उसे उसी जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा। इस घोषणा केचलते भी गरीबों ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी उसी घरको बनाने में लगा दी जहां से उन्हें विस्थापित किया जा रहा है।मंगल सिंह गौड़ का कहना है कि यह भूमि गौड़ सम्राज्ञीवीरांगना रानी दुर्गावती की है और शायद अगर वह होती तोकभी भी अपनी प्रजा को किसी भी कीमत पर घर से बेघरनहीं करती।

उल्लेखनीय है कि मदन महल से सगड़ा तकजूलोलॉजिकल पार्क बनाने की सुगबुगाहट है और इसके लिएप्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं लेकिन हजारों की संख्या मेंलोगों को बेघर कर उनके समुचित पुनर्वास पर किसी काध्यान आकृष्ट नहीं हो रहा है। यदि पुनर्वास किया भी जा रहा हैतो शहर से एक दम बाहर ऐसे में लोग या तो अपना काम छोड़ेया फिर जहां से विस्थापित हुए हैं वहीं आसपास मकानकिराये पर लें। इसके साथ ही स्कूली बच्चों का भविष्य भीदांव पर लग गया है। रामवती मेहरा ने बताया जिस दिन सेयहां के वाशिंदों ने घर टूटने की खबर सुनी है उस दिन से लोगोंका सुखचैन सब छिन गया है। लोग तो सही काम कर पारहे और ही उनके हलक से भोजन का निवाला उतर रहा है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर घर तोड़ना इतना ही जरूरीहै तो पास के क्षेत्र में ही मकान या भूखण्ड दे दिए जाताजिससे कि बच्चे स्कूल जा सकें और उनका भविष्य खराब होता तथा लोग भी अपना कामधंधा पहले के जैसे करतेरहते। इन सभी हालातों के चलते ही विस्थापित हो चुके और विस्थापन की कगार पर बैठे लोगों ने लोकसभा तथा नगर निगम के चुनावों का बहिष्कार का निर्णय लिया है। साथ ही विस्थापित हो चुके और विस्थापन की कगार पर बैठे लोगों ने मुस्लिम और जैन धर्मांलंबियों से अपील की है कि वो भी चुनावों का बहिष्कार करें क्योंकि लोगों के घरों के साथ प्रशासन उनकी मदन महल दरगाह-मस्जिद तथा पिसनहारी की मढ़िया को भी अतिक्रमण बताते हुए तोड़ने की फिराक में है।

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