लोकायुक्त के जाल में कब फसेंगे बड़े मगरमच्छ ?भृस्टाचार चरम पर 

पवन यादव :आज देश जितना तेजी से तरक्की कर रहा है उससे कहीं चार गुना ज्यादा तेजी से हर विभागों में भृस्टाचार तरक्की पर है देश और प्रदेश का ऐसा कोई सरकारी कार्यालय न होगा जहाँ बिना न्योछावर के किसी के काम आसानी से होते हो लेकिन बिडंमना तो देखिए की आज भी अधिकांश सिर्फ छोटी मछली ही लोकायुक के जाल में फस पाती है बड़े मगरमच्छ जिनका मुँह और पेट ,तोंद रिश्वत लेते -लेते चौड़े हो गए है उन पर लोकायुक्त का शिकंजा कब तक कसेगा देखना होगा जबकि देखा जाए तो कई मामलों में लोकायुक्त की चपेट में आये कर्मचारियों के बयान में यह भी रिकार्ड होता है की अमुख साहब को भी पैसे देने पड़ते है में अकेला नहीँ लेता उसके बाद भी उन मोटी रकम लेने वाले बड़े अधिकारियों पर लोकायुक्त द्वारा की जाने वाली कार्यवाही की आंच तक नहीँ आती अब ऐसे में कई सवाल उठते है की भृस्टाचार के इस तालाब की छोटी मछलियों पर ही लोकायुक्त का जाल क्यों फंदा बनता है ?जबकि बड़ी और मोटी रकम गपाने वाले ए सी ऑफिस में बैठकर पेटी पर पेटी अंदर कर रहे है
हर काम के लगते है पैसे :
वहीँ देखा जाये तो सरकारें आती और जातीं रहतीं है सब भृस्टाचार को जड़ से खत्म करने की बातें करते है लेकिन भृस्टाचार चरम पर बढ़ता जा रहा है जिसके जीवंत उदाहरण जबलपुर के सिहोरा पनागर में ही हाल में देखने को मिले जहाँ पर एक ऐसे विभाग का कर्मी पकड़ा गया जिनका नारा ही देशभक्ति और जनसेवा से ही सुरु होता है दूसरा पंचायत विभाग जहाँ पर भोले भाले ग्रामीण रहते है जिनके शायद ही कोई काम हो जो बिना न्यौछावर दिए होते हो तीसरा राजस्व विभाग जहाँ पर अधिकांश गरीब किसान जो की फौती ,नामान्तरण ,सीमाकंन ,बही बनवाने अधिकारियों के चक्कर लगाते दिखाई देते है और अंत मैं न्यौछावर देने के अतिरिक्त कोई चारा नहीँ रहता तब जाकर इन सबके काम होते है हलाकि अभी भी कई विभागों में ईमानदार अधिकारी कर्मचारी भी है जो अपने काम ईमानदारी से करते है लेकिन नासूर बनते जा रहे भृस्टाचार पर कब तक पूरी तरह लगाम लग पायेगी देखना होगा
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