राज्य भूमि सुधार आयोग को राजस्व अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने दिए नजूल भूमि के प्रबंधन एवं निर्वतन के अहम सुझाव

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नजूल नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत
जबलपुर,राज्य भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष श्री इंद्रनील शंकर दाणी की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में संपन्न हुई जबलपुर संभाग के राजस्व अधिकारियों की बैठक में आयोग को नजूल नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है । बैठक में संभागायुक्त श्री राजेश बहुगुणा, कलेक्टर श्री भरत यादव, राज्य भूमि सुधार आयोग के वरिष्ठ सलाहकार ए.के. सिंह भी मौजूद थे ।नजूल भूमि के प्रबंधन एवं निर्वतन के संबंध में राजस्व अधिकारियों से सुझाव प्राप्त करने के लिए आयोजित बैठक के प्रारंभ में आयोग के अध्यक्ष श्री दाणी ने कहा कि राजस्व अधिकारियों से प्राप्त उपयुक्त सुझावों पर आयोग राज्य शासन को नजूल भूमि के प्रबंधन एवं प्रवर्तन की वर्तमान व्यवस्था में सुधार तथा नये नियमों एवं निर्देश तय करने के लिए अनुशंसा करेगा । उन्होंने बताया कि इस विषय पर सुझाव प्राप्त करने के लिए प्रदेश के अन्य संभागीय मुख्यालयों में भी आयोग द्वारा राजस्व अधिकारियों की बैठकें आयोजित की जायेंगी । बैठक में संभाग के राजस्व अधिकारियों ने नजूल रेंट और नजूल प्रीमियम के निर्धारण की प्रक्रिया को आसान करने तथा दरों को तर्कसंगत बनाने का भी सुझाव आयोग को दिया ताकि नजूल भूमि से होने वाले राजस्व में वृद्धि हो । राजस्व अधिकारियों ने नजूल भूमि की परिभाषा नये सिरे से तय करने की आवश्यकता भी बताई । बैठक में नजूल भूमि के प्रबंधन के लिए अनुभाग स्तर पर अलग से तहसीलदार की पदस्थापना करने का सुझाव भी दिया गया । राजस्व अधिकारियों ने भूमि सुधार आयोग के समक्ष नजूल भूमि के वर्गीकरण, सर्वेक्षण एवं रिकार्ड संधारण की आवश्यकता भी बताई । भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष ने बैठक में नजूल भूमियों से प्राप्त होने वाले राजस्व की मांग एवं वसूली में आ रही कठिनाइयों तथा उन्हें दूर करने के बारे में राजस्व अधिकारियों से उनकी राय मांगी । उन्होंने नजूल भूमि की नीलामी की प्रक्रिया तथा नजूल भूमि के आबंटन के बारे में भी राजस्व अधिकारियों से सुझाव देने का आग्रह किया । राजस्व अधिकारियों ने बैठक में कहा कि कतिपय क्षेत्रों को छोड़कर संपूर्ण प्रदेश में नजूल भूमि के प्रबंधन एवं प्रवर्तन के लिए एक ही नियम-निर्देश होने चाहिए । राजस्व अधिकारियों ने नजूल भूमि के अस्थाई पट्टे की वर्तमान व्यवस्था के स्थान पर लायसेंस की व्यवस्था को विस्तारित करने का सुझाव दिया । राजस्व अधिकारियों ने यदि अस्थाई पट्टे की व्यवस्था जारी रखी जाती है तो इसकी अवधि न्यूनतम एक वर्ष एवं अधिकतम पांच वर्ष रखने की राय आयोग को दी । बैठक में कहा गया कि पहली बार नजूल भूमि का पट्टा 5 अथवा 10 वर्ष के लिए दिया जाये तथा भूमि का उपयोग सुनिश्चित होने पर ही 30 से 50 वर्ष तक के लिए नवीनीकृत किया जाना चाहिए । नजूल भूमि के स्थाई पट्टे पर आबंटन की अधिकारिता अनुविभागीय राजस्व अधिकारी को दिये जाने का सुझाव भी आयोग को दिया गया । वाणिज्यिक प्रयोजनों के मामलों में नजूल भूमि के अस्थाई पट्टे नहीं देने की राय भी आयोग की राजस्व अधिकारियों ने दी । नजूल भूमि से प्राप्त होने वाले राजस्व की मांग एवं वसूली में आ रही कठिनाई को दूर करने के बारे में राजस्व अधिकारियों ने भूमि सुधार आयोग को सुझाव दिया कि लीज धारक की लीज समाप्त होने की अवधि से छह गुना भू-भाटक की मांग कायम की जाकर वसूली योग्य हो जानी चाहिए । इसके साथ ही दरों की विसंगतियों को दूर करते हुए भू-राजस्व संहिता की धारा 59 में निर्धारित सिद्धांत एवं दरों के अनुरूप करने की आवश्यकता बताई ताकि राजस्व वसूली में कठिनाई उत्पन्न न हो । राजस्व अधिकारियों ने भूमि सुधार आयोग को भारत सरकार नगरीय निकाय, गृह निर्माण मंडल, विकास प्राधिकरण, कृषि उपज मंडी, वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन, पंचायती राज संस्थाओं, शासकीय स्कूलों तथा सड़कों के लिए नजूल भूमि के आबंटन की वर्तमान व्यवस्था को कायम रखने की बात कही । इसके साथ ही भारत सरकार के विभागों को नजूल भूमि का हस्तांतरण न किया जाकर स्थाई पट्टे पर आबंटन किये जाने का सुझाव भी दिया । नजूल भूमि के स्थाई पट्टे दिये जाने के मामलों में भूमि का उपयोग ग्राम तथा नगर निवेश की अनुज्ञा के आधार पर ही किये जाने की शर्त तय करने तथा स्थानीय निकाय की अनुमति एवं रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी इसका अंग बनाने की आवश्यकता बैठक में बताई । राजस्व अधिकारियों ने पट्टेदारों को एक प्रयोजन के लिए दी गई नजूल भूमि का दूसरे प्रयोजन में उपयोग करने की अनुमति प्रदान किये जाने पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा ऐसी अनुमति विकास योजना में निर्धारित उपयोग हेतु ही दी जानी चाहिए तथा ऐसा किये जाने पर प्रीमियम एवं दरों की गणना में भू-राजस्व संहिता की धारा 59 के सिद्धांतों एवं दरों का प्रयोग किया जाना चाहिए ।

अधिवक्ताओं से भी लिये सुझाव:

राजस्व अधिकारियों की बैठक के बाद राज्य भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष श्री इंद्रनील शंकर दाणी ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में ही आयोजित एक दूसरी बैठक में अधिवक्ताओं से नजूल भूमि के प्रबंधन एवं निर्वतन पर सुझाव प्राप्त किये । बैठक में आयोग के वरिष्ठ सलाहकार ए.के. सिंह, जिला अधिवक्ता संघ के सचिव एडव्होकेट राजेश तिवारी, डॉ. पी.जी. नाजपांडे, अपर कलेक्टर वी.पी. द्विवेदी, डिप्टी कलेक्टर शाहिद खान भी मौजूद थे ।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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