मेडिकल में गर्भवती महिला को नहीं मिला इलाज स्टाफ व सुरक्षा कर्मियों ने की मारपीट

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जबलपुर :जबलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में एक अमानवीय मामला प्रकाश में आया है जहां पर इलाज के लिए ले जाई गई गर्भवती महिला को पहले तो इलाज नहीँ मिला साथ ही दबंगई से स्टाफ व सुरक्षा कर्मियों ने महिला की पिटाई तक कर दी खबरों की मानें तो महाकौशल के सबसे बड़े नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में 8 माह की गर्भवती महिला के साथ स्टाफ व सुरक्षा कर्मियों ने मारपीट की है। अमानवीय व्यवहार करते हुए उसके अस्पताल से भगा दिया गया। मामला जब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो महिला को भरती कर लिया गया, लेकिन वहां पर भी महिला के साथ अमानवीयता की जा रही थी। बताया गया है कि पनागर निवासी आदिवासी महिला यशोदा कोल 8 माह के गर्भ से रही, जिसकी तबियत बिगड़ी तो परिजन पनागर स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां पर डाक्टरों ने जांच के बाद मेडिकल अस्पताल रेफर कर दिया। मेडिकल अस्पताल पहुंचते ही पीड़िता को सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया। जैसे-तैसे परिजन उसे अंदर ले गए तो स्टाफ ने महिला के साथ मारपीट तक कर दी। परिजनों के विरोध करने पर सुरक्षा कर्मियों ने सभी को खदेड़ दिया। शिशु की हो गई मौत जानकारी के अनुसार तीन दिन पहले यशोदा का प्रसव पूर्व ही शिशु की मौत हो गई है। उसके इलाज कराने के लिए परिजन परेशान हो रहे हैं। यदि जल्द ही उसके गर्भ से मृत शिशु को नहीं निकाला तो उसके शरीर में पॉइजन फैल सकता है। अधीक्षक से शिकायत अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को भरती तो करा दिया, लेकिन गायनिक विभाग में भी महिला की तकलीफ कम नहीं हुई। वहां पर महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता रहा, सुरक्षा कर्मियों की दबंगई दिखाते हुए भगा दिया गया।

आयेदिन होती है मरीज़ो से बदसलूकी

वहीँ मेडिकल अस्पताल में मरीजों के साथ की जाने वाली मारपीट की घटना, इलाज में लापरवाही बरतने जाने का कोई यह पहला मामला नहीं है, यह सिलसिला पुराना है यहां पर आने वाले गरीब तबके के मरीजों के साथ आए दिन ऐसा होता रहता है। पीड़ित भी मेडिकल अस्पताल में किए जाने वाले अमानवीय व्यवहार की शिकायत किसी से किए बिना ही चुपचाप चला जाता है। क्योंकि वह भी इस बात को अच्छी तरह जानता है कि शिकायत करने से कोई फायदा नहीं है। शिकायत के बाद और भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

अधीक्षक ने सुनी लेकिन महिला के साथ फिर भी हुआ अत्याचार

वहीं अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को भरती तो करा दिया, लेकिन गायनिक विभाग में भी महिला की तकलीफ कम नहीं हुई। वहां पर महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता रहा, सुरक्षा कर्मियों की दबंगई दिखाते हुए भगा दिया गया।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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