मध्यप्रदेश की इस जनपद पंचायत में धन या मनमर्जी से होते है सब काम आम आदमी परेसान

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भान्डेर,,,मध्यप्रदेश में भले ही सरकार बदल गई हो लेकिन जनपद पंचायतों में आज भी आम आदमी परेसान है काम भी उनके ही आसानी से होते है जिनकी जेब गर्म हो या फिर अधिकारियों की मनमर्जी से ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत भांडेर का आया है जहां पर आजाद पंचायत सचिव कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हाकिम सिहं यादव ने आरोप लगाते हुए बरिष्ठ अधिकारीयो को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि जनपद पंचायत कार्यालय भान्डेर मन मर्जी ओर धन मर्जी से चल रहा है यहा पर कोई सुनने बाला नही है यह हाल पिछले दो बर्षो से हो रहा है
*शासन स्तर से आये दिशा निर्देशो का पालन नही किया जाता है सम्पूर्ण मध्यप्रदेश मै रोजगार सहायको के स्थानांतरण नही होते हैं मगर भान्डेर जनपद मै सुविधा ओर सेटिंग के आधार पर आप आराम से करा सकते हैं जनपद पंचायत भान्डेर के ग्राम पंचायत सचिवो कि सर्विस बुको का पिछले चार बर्षो से सत्यापन सी ओ द्वारा नही किया गया यदि कोई सचिव भाई के साथ दुर्घटना हो जाती हैं तो उसका परिवार दर दर कि ठोकरे खाने को मजबूर हो जायेगा*
*बरिष्ठ अधिकारी महोदय के आदेश पर स्थानांतरण होने के बाद भी कई ग्राम पंचायत सचिव बगैर पंचायतो के घर बैठे हैं जनपद सी ओ किसी भी सचिव को रिलीव नही करना चाहते इस कारण सचिव स्थानांतरण उपरान्त डटे हुये हैं इस से आपस में बुराई दुयेस भावना बन रही हैं*
*जनपद कार्यालय मै सेटिंग के आधार पर एक दूसरे का माल दार काम ठेके से चल जाता है इसका उदाहरण मनरेगा स्टाफ का है बाबू बबेले के स्थान पर बाबू बिरेष त्यागी काम करते है वह धडले से सरपंच, सचिव, रोजगार सहायको से पैसा लेते पैसा नगद ना देने कि स्थिति में त्यागी द्वारा अपने कमीशन के लिए दतिया कि फर्म का बिल लगाया जाता है इस कारण कईयो बार त्यागी से सरपंच, सचिव, रोजगार सहायको से झगड़ा हो गया है*
*पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना मै जनपद पंचायत भान्डेर को सराहनीय कार्य के लिए एक लाख रुपये पुरूषकार मिला था वह राशि का पता नहीं कहा गायव हो गई*
*आज भान्डेर जनपद कार्यालय कि यह स्थिति है कि बी डी ओ, पंचायत इस्पेक्टर,डी ओ जैसे बरिष्ठ अधिकारियों को सीट नही वही पर सेटिंग बाले बाबू लोगों को अधिकारी जैसी सुविधा प्राप्त है*
यह बात जो भी ब्यक्ति करता है उसे डरा धमकाया जाता है इसलिए बरिष्ठ अधिकारी महोदय से आग्रह है जनपद कार्यालय स्तर पर सुधार हो ताकि छोटे कर्मचारी मानसिक दबाब से निकल कर शासन कि योजनाओं का लाभ समाज के अन्ति ब्यक्तियो तक पहुंचा सके

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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