मकर सक्रांति इस दिन, भीष्म ने त्यागे थे प्राण ,सतधारा से क्यों विलुप्त हो गई दूध की सात धाराएं ?

0
जबलपुर :मकर सक्रांति को लेकर इस बार भृम की स्तिथि बनी हुई है ,क्योंकि 14 व 15 जनवरी को लेकर लोगों में भी तरह -तरह की चर्चायें है ,लेकिन इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी की जगह 15 को पड़ रही है ,आज हम आपको जबलपुर जिले के एक स्थल की कहानी बताने जा रहे है जहां कभी मकर सक्रांति के दिन हिरन नदी में दूध की सात धाराएं बहा करती थी ,लेकिन अब सात धाराओं की कहानी बया करने वाले सतधारा का अब नाम ही रह गया अब यहाँ दूध की सात धाराएं विलुप्त हो गई स्थानीय लोगों की मानें तो गंदगी और उपेक्षा की शिकार हिरन की इन अविरल धारायें अब पुरानी बातें बनकर रह गई है लोगों का मानना है की पहले मकर संक्रांति के दिन ब्रम्हमुहूर्त में एक दो मिनट के लिए यहाँ पर दूध की सात अविरल धाराएं दिखाई देतीं थी लेकिन धीरे ;धीरे ये छड़ में तब्दील हो गई जिनके पीछे की बजह देखि जाये तो घाट के इर्द गिर्द साफ सफाई का आभाव और गन्दगी बिराजमान होने के चलते ये हो रहा हैहलाकि यहाँ पर प्राचीन मंदिर अभी भी है जिनके सामने यहाँ पर विशाल मेले का आयोजन प्रतिवर्ष होता है जिसमे हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है

सतधारा स्थल से जुडी रहस्यमय बातें

बड़े बुजुर्गों का कहना है की सतधारा नाम के पीछे का आशय सात धाराओ से है जिनमें मकर सक्रांति के दिन दूध जैसी धारायें बहती थी लेकिन कुछ समय से इनके दर्शन अब नहीँ हो रहे है लोगों की मानें तो कुछ वर्ष पूर्व वहाँ पर हिरन नदी सात धाराओ में तब्दील थी लेकिन धीरे धीरे नदी का जलस्तर गिरने से और घाट पर लोगों द्वारा साफ सफाई न रखने से लेकर कई ऐसी बातें निकल कर सामने आई जिनके चलते आज वहाँ पर सिर्फ नाम की सात धाराये रह गई है

इस दिन भीष्म पितामह ने त्यागे थे दिन प्राण

मकर सक्रांति उत्तरायण पर्व से जुड़ीं प्राचीन कथायें आती है जिनका शाश्त्रो में लेख है पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन से दिन से सूर्य देवता उत्तर दिशा की तरफ धीरे धीरे सरकना सुरु करते है इसी दिन सरसैया पर पड़े भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे महाभारत काल में अटल ध्रण प्रतिज्ञा वाले भीष्म पितामह ने अपनी माँ को दिए बचन की खातिर आजीवन ब्रम्हचर्य ब्रत का पालन किया शास्त्रो में आता है की भीष्म पितामह के ध्रण निश्चय और ब्रम्हचर्य व्रत की बजह से ही श्रीकष्ण को युद्ध के दौरान अर्जुन को पितामह से हारते देख शस्त्र उठाना पड़ा विदित हो की भगवान ने महाभारत के युद्ध के दौरान शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा की थी वहीँ भीष्म पितामह ने महाभारत का पूरा युद्ध सरसैया पर पड़े पड़े देखा और उत्तरायण के दिन भगवान श्रीक्रष्ण की उपस्थिति में ही पितामह ने अपने प्राण त्यागे थेतिल का उबटन तिल मिश्रत जल से स्नान और तिल के दान करने से इस दिन बड़ा पुण्य लाभ होता है इस दिन लोग तिल के लड्डू बनाते है

कब है मकर संक्रांति का त्योहार?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो यह घटना मकर संक्रांति कहलाती है। सूर्य का यह गोचर प्रति वर्ष 14 या 15 जनवरी को होता है। साल 2020 में सूर्य का मकर राशि में गोचर 15 जनवरी को हो रहा है, इसलिए इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को पड़ रही है।

इस दिन ब्रम्हमुहूर्त में स्नान ,दान करने से मिलता है मोक्ष

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति के शुभ अवसर जो व्यक्ति पवित्र नदी में डुबकी लगाता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है। इस दान धर्म का कार्य करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x