फोन करने से घर पर हो रहा बीमार पशुओं का इलाज

अब तक जिले के डेढ़ हजार से अधिक पशुओं का हुआ उपचार

टोल फ्री नंबर 1962 से मिल रही मदद-पशुपालकों में लोकप्रिय हुई पशु संजीवनी योजना

जबलपुर : जिले के ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों के पशुपालकों को अब पशुओं के बीमार होने पर अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पशुपालकों को घर पहुंच नि:शुल्क पशु उपचार सुविधा मुहैया कराई जा रही है। पशुपालक पशु संजीवनी योजना के तहत स्थापित राज्य स्तरीय कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1962 पर फोन कर अपने पशु के बीमार होने की सूचना देते हैं और नजदीकी विकासखंड में तैनात चलित पशु चिकित्सा वाहन मौके पर पहुंच जाती है।
ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में दिन-ब-दिन खासी लोकप्रिय हो रही पशु संजीवनी योजना के संबंध में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाऐं डॉ. ए.पी. गौतम ने बताया कि जिले में अब तक चलित पशु चिकित्सा वाहन द्वारा एक हजार 546 पशुओं का उपचार एवं 138 पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। इन पशुओं के उपचार हेतु सभी विकासखंडों को मिलाकर चलित पशु चिकित्सा वाहन अब तक 31 हजार 346 किलोमीटर चल चुके हैं। पशु संजीवनी योजना के तहत अब तक विकासखंड कुंडम के 277 पशुओं, पनागर के 289 पशुओं, शहपुरा के 221 तथा जबलपुर के 104 पशुओं का घर पहुंच कर इलाज किया जा चुका है। जबकि विकासखंड मझौली के 253, सिहोरा के 157 तथा पाटन के 245 पशुओं को उपचारित किया जा चुका है। पशु संजीवनी प्रभारी डॉ. अजय गुप्ता बताते हैं कि कॉल सेंटर 1962 पर फोन करने पर पशुपालक का मोबाइल नंबर लिया जाता है, इलाज हेतु वाहन पहुंचने की सूचना पशुपालक को एसएमएस के जरिये दी जाती है। पशुपालक के पास स्वयं का मोबाइल नहीं होने पर पास-पड़ोस का नंबर दिया जा सकता है।
पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी डॉ. अरूण पांडेय कहते हैं कि जिले के सभी सात विकासखंडों में अलग-अलग चलित पशु चिकित्सा वाहन संचालित की जा रही हैं। इस चलित वाहन में पशु चिकित्सक, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, गौ-सेवक और जरूरी दवाइयाँ मौजूद रहती हैं। सभी वाहन जीपीएस सुविधा से लैस हैं, ताकि वाहनों के आवागमन की मॉनीटरिंग की जा सके।

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