प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित क्लासिकल म्यूजिक कार्यक्रम आज, बड़े -बड़े कलाकारों सहित बच्चों की होगी प्रस्तुति

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जबलपुर :भारतीय सँस्कृति में कहीँ न कहीँ गीत -संगीत का अपना एक अलग ही स्थान रहा है इसी परंपरा को आंगे बढ़ाती प्राचीन कला केंद्र संस्था जिसके सचिव सजल कौसर ने प्रेसवर्ता कर बताया बताया की प्राचीन कला केंद्र की स्थापना वर्ष 1956 में चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई थी, पूर्वी भारत के कोलकाता में एक आंचलिक कार्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा), पटना, (बिहार), जोरहाट (असम) में कार्यालय में है और एक क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली में है। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य गुरु शिष्य के परम्परा के तहत क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वैसे तो किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता का होना जरूरी नहीं है। फिर भी इस क्षेत्र में उपलब्ध कोर्स में प्रवेश के लिए बुनियादी आवश्यकता है। यह संस्थान संगीत कला के क्षेत्र में छात्रों को अंतिम 60 में अवसर पाने के लिए के लिए प्रोत्सहित करना है।
प्राचीन कला केंद्र की तरफ से 19 जनवरी, 2020 को एक नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित की है शाम 6 बजे शहीद स्मारक, गोल बाजार, जबलपुर। जयपुर से उस्ताद निसार हिसार खान द्वारा किया गया प्रदर्शन उनकी शास्त्रीय प्रस्तुति के साथ साथ आपको अन्य प्रसिद्ध कलाकारों के साथ शाम के बाद नृत्य प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों को अंजाम देता है और कई फेस्तिवल का आयोजन करता है शास्त्रीय संगीत और नृत्य, न केवल चंडीगढ़ में बल्कि विभिन्न अन्य भारतीय राज्यों / शहरों में अपने संबद्ध केंद्रों के साथ-साथ केंद्र / राज्य के सहयोग से सहयोग / संघ सरकारें और उनके सांस्कृतिक निकाय। सेमिनार, सम्मेलनों, कार्यशालाओं, चित्रकला का आयोजन प्रदर्शनियां, प्रतियोगिताएं आदि इसके कुछ अन्य मुख्य कार्य हैं।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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