पैसा है तो सब संभव है कौन कहता है अब साहब दबाकर नहीं लेते

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(पवन यादव )

कौन कहता है की देश से भृस्टाचार खत्म हो गया है आज भी आपके पास पैसा हो तो सब संभव है आज भी साहब टेबल के नीचे नहीँ लिफाफे में दबाकर लेते है चाहे वह कुछ भी हो मतलब इस देश में नियम कानून की बातें सिर्फ किताबों तक ही अच्छी लगती है यथार्त कुछ और है वो कहते है हमने भृस्टाचार पर लगाम लगा दी लेकिन क्या वास्तव में आज भृस्टाचार से देश मुक्त हो गया है ये तो वह गरीब जनता जानती है जो किसी न किसी तरह दबंगो व बाहुबलियों के जुल्मों को सहकर भी चुप है क्योंकि क्या करे भाई आज ईमान के भी दाम है बस उचित दाम लगाने वाला हो सब कुछ सम्भव है जब भी इस तरह की घटनाएं समाज मे घटित होती है तो हमेशा ही बाहुबलियों का ही बर्चस्व होता है आज के समय यदि कोई गरीब आदमी भूख से पीड़ित होकर एक रोटी ही चुरा ले तो फिर देखो पुलिस उसको कानून का पूरा अध्याय पढा देगी लेकिन यदि कोई दबंग पैसा वाला कोई गरीब का खून बहा दे तो पुलिस उल्टे ही गरीब को नियम कानून का पाठ पढ़ाने लग जाती है हलाकि देश प्रदेश में सरकार कोई की भी रही हो इस तरह के कारनामें देखे व सुने गए है तो वहीं कुछ ईमानदार अधिकारियों को नेता आसमान के छेद दिखाने की बात कर उसको गलत काम करने मजबूर कर देती है खेर ये सब रोज की बातें है यकीन न हो तो किसी भी कानून के ऑफिस के बाहर दो चार दिन घूमकर बैठकर लोगों से मिलकर देखो खुद आंख भर जाएगी की आज भी न्याय गरीब की झोली से कोशों दूर है

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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