पंजीयक एवं रजिस्ट्री विभाग में दलालों का एकाधिकार

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सतना (विशेष रिपोर्ट यदुवंशी ननकू यादव ):जिला कलेक्ट्रेट के प्रथम तल में पंजीयक एवं रजिस्ट्री कार्यालय संचालित होता है। धनलक्ष्मी से परिपूर्ण रहने वाले इस विभाग में दलालों का पूरा झुंड तैनात रहता है। जमीन रजिस्ट्री के कारोबार में शासन को चूना लगाने का काम जिम्मेदारी के साथ किया जाता है। पंजीयक एवं रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात कम्प्यूटर आपरेटर भी अपने आपको तीस मार खान समझते हैं और वे जिला प्रशासन की किसी भी कार्रवाई से भय नहीं खाते हैं।

वे कहते हैं कि बकायदा हमारे विभाग से मुख्य पदों पर बैठने वाले आला अधिकारियों को एक मुश्त कमीशन उपलब्ध कराया जाता है। जमीन माफिया का बेजोड़ नेटवर्क आज भी कायम है, यह सही है कि साल 2016 में नोटबंदी लागू किए जाने के बाद जमीन कारोबार में थोड़ा ठहराव आया जरुर था पर समय के साथ पहले जैसे हालात पैदा हो चुके हैं। कम्प्यूटर आपरेटर अनिल कुमार गोयल जमीन कारोबारियों का मददगार बन चुका है। हर रजिस्ट्री पर यहां पर लोगों का कमीशन पहले से तय होता है। कलेक्ट्रेट में संचालित पंजीयक एवं रजिस्ट्री कार्यालय में अनिल गोयल से कहीं बड़े जमीन दलाल काबिज हैं। रजिस्ट्री करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने खुद अपनी पसंद के दलालों को पाल रखा है। सुनियोजित तरीके से जमीनों की रजिस्ट्री में शासन को चूना लगाने का काम अधिकारियों की देखरेख में किया जाता है। पंजीयक एवं रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात बाबुओं, कर्मचारियों और रजिस्ट्री करने वाले अधिकारियों की सुनियोजित मिलीभगत के कारण मनमाने दाम पर जमीन की रजिस्ट्री को अंजाम दिया जाता है। कुछ मामलों में कलेक्टर गाइडलाइन को व्यक्तिगत फायदे के लिए नजरअंदाज किया जाता है।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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